यह तस्वीर केवल एक ईंट-गारे से बनी संरचना नहीं है, बल्कि यह उस दिव्य परंपरा और गुरु-शिष्य के अटूट संबंध की जीवित गवाह है, जिसे हम बागेश्वर धाम के 'सन्यासी बाबा' की समाधि के रूप में जानते हैं।
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