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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
दिनारा तालाब की दुर्दशा पर फूटा जनआक्रोश, बरसात से पहले सुधार नहीं हुआ तो हो सकता है बड़ा हादसा कल्लू महाराज
कलेक्टर अर्पित वर्मा से सौंदर्यीकरण, 16 द्वारी, चेक डैम और जर्जर पाल की तत्काल मरम्मत की मांग
दिनारा (शिवपुरी)। ऐतिहासिक एवं विशाल दिनारा तालाब आज अपनी बदहाली पर स्वयं आंसू बहाता नजर आ रहा है। कभी अपनी सुंदरता और जल संरक्षण के लिए प्रसिद्ध यह तालाब आज शासन-प्रशासन की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। तालाब के घाट, सीढ़ियां, पाल (बंध) और ऐतिहासिक 16 द्वारी कई स्थानों से क्षतिग्रस्त होकर टूट-फूट की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
समाजसेवी एवं गौ सेवक कल्लू महाराज ने शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा से मांग करते हुए कहा है कि बरसात शुरू होने से पहले दिनारा तालाब का तत्काल निरीक्षण कराकर मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण कराया जाए। अन्यथा बरसात के दौरान किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
कल्लू महाराज ने बताया कि तालाब की पाल कई जगह से चटक चुकी है। वर्षों पुरानी सीढ़ियां जर्जर होकर खतरनाक स्थिति में पहुंच गई हैं, जिन पर फिसलकर कभी भी कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो सकता है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई ऐतिहासिक 16 द्वारी की आज तक समुचित मरम्मत नहीं हो सकी है, जिससे दिनारा की गौरवशाली पहचान लगातार मिटती जा रही है।
उन्होंने बताया कि तालाब से लगा हुआ चेक डैम भी कई वर्षों से टूटा पड़ा है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो बरसात का बहुमूल्य पानी व्यर्थ बह जाएगा, जिससे किसानों, पशु-पक्षियों और गौवंश के सामने जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
कल्लू महाराज ने कहा कि दिनारा तालाब केवल एक जलाशय नहीं बल्कि हजारों किसानों की जीवनरेखा है। इस तालाब के पानी से अनेक गांवों की खेती और आजीविका जुड़ी हुई है। जल संरक्षण और क्षेत्र की समृद्धि के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाना अत्यंत आवश्यक है।
प्रमुख मांगें
दिनारा तालाब का व्यापक सौंदर्यीकरण कराया जाए।
जर्जर एवं फिसलनयुक्त सीढ़ियों की मरम्मत कराई जाए।
ऐतिहासिक 16 द्वारी का पुनर्निर्माण एवं संरक्षण किया जाए।
टूटे हुए चेक डैम की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
तालाब की पाल एवं अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों को बरसात से पहले मजबूत किया जाए।
कल्लू महाराज ने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि जनहित में प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। समय रहते कार्यवाही की गई तो हजारों किसानों, पशु-पक्षियों और आमजन को इसका लाभ मिलेगा।
तालाब बचेगा तो जल बचेगा, जल बचेगा तो कल बचेगा"
जल नहीं तो कल नहीं
