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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो” – करेरा तहसील में गूंजा जनआंदोलन का स्वर।
करेरा तहसील में आज एक भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जहां बड़ी संख्या में गौ सेवक, साधु-संत, माताएं-बहनें और स्थानीय नागरिक एकत्रित होकर गौ माता को “राष्ट्र माता” घोषित करने की मांग को लेकर आगे आए। इस दौरान राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया, जिसमें भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप गौ माता को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की अपील की गई।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि भारतीय संस्कृति में गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और धर्म का प्रमुख आधार है। सनातन परंपरा में गौ माता को “माता” का दर्जा दिया गया है और इसे जीवनदायिनी माना जाता है। उपस्थित लोगों ने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता की भावना है कि गौ माता को पशु श्रेणी से हटाकर “राष्ट्र माता” का सम्मान दिया जाना चाहिए, जिससे भारतीय संस्कृति की गौरवपूर्ण परंपरा को और मजबूती मिल सके।
इस अवसर पर गौ सेवक कल्लू महाराज ने जोरदार शब्दों में कहा कि आज पूरे भारत में एक ही स्वर गूंज रहा है—“हमारी गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए।” उन्होंने कहा कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि देश की आस्था और पहचान से जुड़ा विषय है। उन्होंने आगे कहा कि गौवंश के बिना भारतीय संस्कृति अधूरी है और इसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि वर्तमान समय में देश में गौवंश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। सबसे अधिक तस्करी यदि किसी पशु की होती है, तो वह गाय है। इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की आवश्यकता है। साथ ही, गौवंश के वध से जुड़े सभी अवैध एवं वैध कारखानों को बंद करने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई, ताकि गौ माता की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं और संतों ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गौ माता केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली और कृषि व्यवस्था का भी आधार रही है। इसलिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना समय की मांग है।
करेरा तहसील में उठी यह आवाज अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे संविधान के दायरे में रहते हुए अहिंसक तरीकों से इस मांग को देशभर में आगे बढ़ाएंगे।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि गौ माता के प्रति लोगों की आस्था और सम्मान आज भी उतना ही प्रबल है, और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए समाज का एक बड़ा वर्ग सक्रिय रूप से प्रयासरत है।
