दिनारा में जमीनों पर ‘भूमि माफिया’ की नजर का आरोप, गरीब बोले—कागज हमारे, कब्जा दबंगों का! समाजसेवी कल्लू महाराज ने उठाई जांच की मांग।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुर

समाचार 


दिनारा में जमीनों पर ‘भूमि माफिया’ की नजर का आरोप, गरीब बोले—कागज हमारे, कब्जा दबंगों का! समाजसेवी कल्लू महाराज ने उठाई जांच की मांग।

खसरा नंबर 347 की जमीन को लेकर गंभीर सवाल, मृत व्यक्ति की जमीन की रजिस्ट्री कैसे हुई? कलेक्टर अर्पित वर्मा और करैरा एसडीएम से पुनः जांच की मांग।

दिनारा/शिवपुरी। दिनारा क्षेत्र में भूमि संबंधी विवादों और कथित अवैध कब्जों को लेकर समाजसेवी कल्लू महाराज ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीनों पर दबंगों तथा कथित भूमि माफियाओं की नजर है। उनका कहना है कि कई मामलों में जमीनों की रजिस्ट्री, वास्तविक रकबे और मौके पर कब्जे की स्थिति की जांच की आवश्यकता है।

समाजसेवी कल्लू महाराज ने शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा और करैरा एसडीएम से दिनारा क्षेत्र में भूमि संबंधी मामलों की व्यापक जांच एवं आवश्यकतानुसार अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

खसरा नंबर 347 को लेकर उठे गंभीर सवाल

कल्लू महाराज ने दिनारा में अशोक होटल के पास स्थित खसरा नंबर 347 की जमीन को लेकर विशेष जांच की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि उक्त जमीन में उपलब्ध वास्तविक रकबे और दस्तावेजों में दर्ज रकबे के बीच अंतर की जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा, सीमांकन, रजिस्ट्री दस्तावेज और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए। यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में कोई अंतर पाया जाता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए।

मृत व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री का दावा, जांच की मांग।

कल्लू महाराज ने एक और गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बैजनाथ पुत्र जगदीश तिवारी, जिनके बारे में बताया गया है कि उनका निधन हो चुका है, उनसे संबंधित जमीन की रजिस्ट्री कैसे हुई इसकी भी जांच होना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित रजिस्ट्री के दस्तावेज, विक्रेता की पहचान, हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान, पंजीयन कार्यालय के रिकॉर्ड तथा संबंधित राजस्व दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाए। यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए।

गरीब कोर्ट के चक्कर कैसे काटे।

समाजसेवी कल्लू महाराज का कहना है कि जमीन विवाद में सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को होती है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई लोग लंबे समय तक न्यायालयों के चक्कर नहीं काट पाते और इसी वजह से वे दबाव में समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में गरीब लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और राजस्व अधिकारियों द्वारा मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

दिनारा में अभियान चलाकर कब्जों की जांच की मांग*

कल्लू महाराज ने कहा कि दिनारा क्षेत्र में कॉलोनियों, मुख्य सड़कों के आसपास बने मकानों और अन्य भूमि पर कथित कब्जों की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसी भी व्यक्ति की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत हो तो रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराई जाए।

उन्होंने कहा कि किसी के पास दबाव, प्रभाव या आर्थिक ताकत अधिक होने के कारण उसे किसी दूसरे की जमीन पर अधिकार नहीं मिल सकता। राजस्व रिकॉर्ड और कानून के आधार पर ही वास्तविक मालिकाना हक तथा कब्जे की स्थिति तय होनी चाहिए।

एक बार फिर चलाया जाए विशेष अभियान”

कल्लू महाराज ने कलेक्टर और एसडीएम से मांग की है कि दिनारा क्षेत्र में भूमि विवादों को लेकर विशेष अभियान चलाया जाए। इस दौरान संदिग्ध रजिस्ट्री, विवादित भूमि, सरकारी जमीन, रास्तों और कथित अवैध कब्जों की शिकायतों की जांच की जाए।

उन्होंने विशेष रूप से खसरा नंबर 347 सहित उन जमीनों का सीमांकन कराने की मांग की है, जिनके रकबे अथवा स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं।

प्रशासनिक जांच से सामने आ सकता है पूरा सच

कल्लू महाराज ने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए हैं। उनका कहना है कि यदि सभी दस्तावेजों और जमीनों का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

उन्होंने कलेक्टर अर्पित वर्मा और करैरा एसडीएम से अपील की है कि दिनारा में भूमि संबंधी शिकायतों की गंभीरता से जांच कराकर गरीब एवं वास्तविक भू-स्वामियों को न्याय दिलाया जाए।

अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि खसरा नंबर 347 सहित अन्य विवादित जमीनों में रजिस्ट्री, रकबे, स्वामित्व और कब्जे को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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