महर्षि महाविद्यालय की 50 सीटों पर बड़ा सवाल: मान्यता की जांच किसने की, भवन कहां है और 2026-27 के विद्यार्थियों की कक्षाएं कहां लगेंगी?

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 

महर्षि महाविद्यालय की 50 सीटों पर बड़ा सवाल: मान्यता की जांच किसने की, भवन कहां है और 2026-27 के विद्यार्थियों की कक्षाएं कहां लगेंगी?


शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

वर्ष 2026-27 में डीएलएड की 50 सीटों पर प्रवेश होने की जानकारी सामने आने के बाद 

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया गया है, 

उनका नियमित प्रशिक्षण आखिर किस भवन में और किस स्थान पर कराया जाएगा? 

यदि संस्थान के नाम पर दर्ज भवन और मौके पर उपलब्ध भवन के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है, 

तो मान्यता एवं प्रवेश प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की उपलब्ध सूची में Maharishi Mahavidyalaya, Bercha Road, District Shivpuri के नाम से D.El.Ed की 50 सीटों का रिकॉर्ड दिखाई देता है। 

वहीं NCTE के रिकॉर्ड में इसी नाम से शाजापुर के Bercha Road पते पर भी अलग प्रविष्टि मौजूद है और वहां 50 सीटों की बहाली का आदेश जनवरी 2026 में जारी हुआ था। 

ऐसे में शिवपुरी वाले संस्थान के सटीक भवन, भूमि, पता और भौतिक सत्यापन को लेकर स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

NCTE

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भवन है तो मौके पर कहां?

शिकायत और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के अनुसार, 

जिस स्थान को महर्षि महाविद्यालय से जोड़कर बताया जा रहा है, 

वहां महाविद्यालय की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने को लेकर सवाल हैं। 

आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि पुरानी बिल्डिंग को नया नाम देकर “मेवाड़ रिजॉर्ट” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और यह स्थान पोहरी रोड पर बताया जाता है।

यदि ऐसा है तो जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मान्यता के समय निरीक्षण टीम ने किस भवन का भौतिक सत्यापन किया था? 

निरीक्षण के दौरान भवन का पता, खसरा नंबर, स्वामित्व/किरायानामा, कक्षों की संख्या, क्षेत्रफल, फर्नीचर, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कार्यालय, स्टाफ रूम तथा विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं का सत्यापन किस अधिकारी ने किया?

50 सीटें भर गईं, लेकिन कक्षाएं कहां?

सबसे गंभीर सवाल उन 50 नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का है जिनका भविष्य इस संस्थान से जुड़ा है।

यदि ऑनलाइन प्रवेश व्यवस्था में महर्षि महाविद्यालय की 50 सीटें भर चुकी हैं, तो विद्यार्थियों के लिए नियमित कक्षाएं, प्रायोगिक प्रशिक्षण, शिक्षण-अभ्यास और अन्य अनिवार्य गतिविधियां किस परिसर में संचालित होंगी?

मध्यप्रदेश के e-Pravesh पोर्टल पर 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया और NCTE से संबंधित प्रवेश संबंधी सूचनाएं जारी की गई हैं। 

इसलिए अब यह केवल संस्थान का आंतरिक विषय नहीं रह जाता,

बल्कि प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा सार्वजनिक प्रश्न बन जाता है।

e-Pravesh +1

मान्यता देने वालों से पांच सीधे सवाल

वर्ष 2026 में महर्षि महाविद्यालय की मान्यता/प्रवेश प्रक्रिया के दौरान किस-किस अधिकारी ने भौतिक निरीक्षण किया?

निरीक्षण रिपोर्ट में महाविद्यालय का पूरा पता, भवन और भूमि का विवरण क्या दर्ज है?

निरीक्षण के समय मौके पर महाविद्यालय का स्वतंत्र एवं निर्धारित भवन उपलब्ध था या नहीं?

50 विद्यार्थियों के लिए नियमित कक्षाएं और प्रायोगिक प्रशिक्षण किस स्थान पर कराया जा रहा है?

यदि भवन को लेकर कोई परिवर्तन हुआ है तो NCTE/संबंधित विभाग को इसकी विधिवत सूचना और अनुमति दी गई या नहीं?

जांच में सामने आए तो जिम्मेदारी तय हो

मामले में अभी आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय दस्तावेजी और भौतिक जांच आवश्यक है। 

जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, DIET तथा संबंधित मान्यता प्राधिकारी को संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में गलत पता, गलत भवन, फर्जी/भ्रामक दस्तावेज या वास्तविक स्थिति छिपाने जैसी बात सामने आई, 

तो संबंधित अधिकारियों और संस्था की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। 

परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर आपराधिक कानून की संबंधित धाराएं, दस्तावेजों में कूटरचना/धोखाधड़ी से संबंधित प्रावधान तथा शिक्षा संबंधी नियामकीय कार्रवाई लागू हो सकती है; 

शकिस धारा में कार्रवाई होगी, यह जांच और कानूनी राय के बाद ही तय होना चाहिए।

विद्यार्थियों के भविष्य पर सबसे बड़ा सवाल

महर्षि महाविद्यालय की 50 सीटों पर प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं का सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। 

उन्हें यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनका कॉलेज भवन कहां है, कक्षाएं कब और कहां लगेंगी, प्रशिक्षण किस संस्था/परिसर में होगा और उनकी डीएलएड शिक्षा नियमानुसार संचालित हो रही है या नहीं।

अब गेंद जिला प्रशासन और संबंधित मान्यता अधिकारियों के पाले में है।

यदि महाविद्यालय का भवन मौजूद है तो उसे सार्वजनिक रूप से दिखाया जाए, 

निरीक्षण रिपोर्ट सामने लाई जाए और 50 विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।

यदि मौके पर मान्यता के अनुरूप आधारभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।

**यह मामला केवल एक महाविद्यालय का नहीं, बल्कि उन 50 विद्यार्थियों के भविष्य का है—जिन्होंने प्रवेश लेकर अपने शिक्षक बनने का सपना देखा है।**

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