भोपाल के मुगलिया कोट में "श्रीराम कॉलेज" का पता खसरा नंबर 148/149 पर दर्ज है। वहाँ जाकर देखो - सिर्फ़ खाली खेत, घास-फूस और बोर्ड लगा हुआ। पास में बगलामुखी ग्रुप का बोर्ड।

न्यूज़ चाचा का धमाका 

जीतेन्द जैन जिला शिवपुरी 

समाचार

ये "शिक्षा के नाम पर systematic लूट" का खुलासा है।

 मध्य प्रदेश में BJP सरकार के राज में 125




से ज्यादा निजी बीएड कॉलेज ऐसे चल रहे हैं जो कागजों पर तो चमकते हैं, लेकिन हकीकत में खाली खेत, एक कमरा या छोटे स्कूल के कोने में ठसक रहे हैं। NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट ने पूरा खेल उजागर कर दिया है।

खेतों में कॉलेज, हवा में डिग्रियाँ!

भोपाल के मुगलिया कोट में "श्रीराम कॉलेज" का पता खसरा नंबर 148/149 पर दर्ज है। वहाँ जाकर देखो - सिर्फ़ खाली खेत, घास-फूस और बोर्ड लगा हुआ। पास में बगलामुखी ग्रुप का बोर्ड। 

पिछले 10 साल से हर साल 100-150 छात्र "पास आउट" हो रहे थे इस "कॉलेज" से। डिग्रियाँ जारी हो रही थीं, फीस वसूली जा रही थी - लेकिन कॉलेज था ही कहाँ?

कुछ कॉलेज छोटे स्कूलों के परिसर या एक-दो कमरों में चल रहे। लाइब्रेरी? लैब? योग्य शिक्षक? नियमित क्लास? सब कागजों में। छात्र आते भी नहीं।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) के अधीन 127 प्राइवेट बीएड कॉलेज। ऑन-स्पॉट वेरिफिकेशन में:

- 25 में बड़ी कमियाँ

- 5 में गंभीर गड़बड़ियाँ

- 2 गायब

- 3 गलत जगह पर चल रहे

फिर भी 24 जून को यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद ने "महज एक नोटरीकृत हलफनामा" लेकर 125 कॉलेजों को सशर्त संबद्धता दे दी। 

कॉलेजों ने लिख दिया - "हम सब मानक पूरा करते हैं, वरना बाद में रद्द कर देना"। 

मंत्री का रोल?

उच्च शिक्षा मंत्री "इंदर सिंह परमार" की नोटशीट के आधार पर 82 कॉलेजों की प्रोफाइल एडमिशन पोर्टल पर पहले ही '

ओके' कर दी गई, जबकि कार्यपरिषद की औपचारिक मंजूरी बाकी थी। 

रजिस्ट्रार ने सफाई दी कि समयसीमा थी, छात्रों का भविष्य खराब न हो। 

प्रदेश में 600+ शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान हैं, 58,000+ बीएड सीटें। हर साल 47-48 हजार युवा इनमें दाखिला लेते हैं। फीस? लाखों में। 

एक पूरी पीढ़ी को "फर्जी डिग्री" देकर स्कूलों में शिक्षक बनाने की तैयारी!

ये सिर्फ बीएड तक सीमित नहीं...

MP में नर्सिंग कॉलेजों, पैरामेडिकल, ITI और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेस में भी ऐसे ही फर्जीवाड़े की खबरें आ चुकी हैं। 

कलेक्टर स्तर पर जांच, STF रेड, FIR - सब हो रहा है, लेकिन सिस्टम जस का तस। 

तीखा सवाल: सरकार "सनातन संस्कृति, हिंदू गौरव, राम मंदिर" के नाम पर वोट मांगती है। माइक्रोफोन पर भक्ति की लहरें छोड़ती है। लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर युवाओं का भविष्य खेतों और कागजों में बेच दिया जा रहा है। 

धर्म की आड़ में "जनता को मुर्ख बनाना" आसान हो गया है - क्योंकि असली सवाल पूछने वाले कम है। लाखों युवा फर्जी डिग्री लेकर स्कूल में पढ़ाने जाएंगे, बच्चे अनपढ़ रहेंगे, और सिस्टम घूमता रहेगा। 

ये "शिक्षा का हत्याकांड" है। एक तरफ "विकसित भारत" का नारा, दूसरी तरफ खेत में B.Ed फैक्ट्री। 

जनता को समझना चाहिए - "कागजी विकास" से असली तरक्की नहीं होती। 🔥

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