माँ भले ही बड़ी डिग्रियाँ और किताबों की पढ़ाई न कर पाईं हों

न्यूज़ चाचा का धमाका

जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 

माँ भले ही बड़ी डिग्रियाँ और किताबों की पढ़ाई न कर पाईं हों,


लेकिन जिंदगी का असली ज्ञान, संस्कार, मेहनत और संघर्ष जीना उन्होंने ही सिखाया है।

हम भाई-बहनों के सपनों को पूरा करने के लिए माँ ने अपने हर सुख का त्याग किया,

खुद हर तकलीफ़ सह ली लेकिन हमारी आँखों में कभी कमी और आँसू नहीं आने दिए।

आज हम जो भी हैं, जिस मुकाम पर खड़े हैं, उसमें माँ की तपस्या, त्याग, मेहनत और आशीर्वाद की सबसे बड़ी भूमिका है।

उन्होंने सिर्फ हमें जन्म ही नहीं दिया, बल्कि अपने संस्कारों और प्रेम से हमारा भविष्य भी संवारा है।

माँ के आँचल में मुझे दुनिया का सबसे बड़ा सुकून, सबसे बड़ी खुशी और भगवान का साक्षात रूप मिला है।

मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि मेरी माँ को लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की हर खुशी मिले।

अगर सच में हर जन्म होता है,

तो हर बार मुझे इसी माँ की कोख से जन्म मिले…

क्योंकि मेरे लिए मेरी माँ ही मेरी पहली दुनिया, पहला भगवान और जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं।

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