हृदय को झकझोर देने वाला दृश्य: छोटे नंदी महाराज ने खोया पैर, फिर भी जिंदा है जीने का जज्बा।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 

हृदय को झकझोर देने वाला दृश्य: छोटे नंदी महाराज ने खोया पैर, फिर भी जिंदा है जीने का जज्बा।


करैरा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक दर्दनाक हादसे में गौ माता के छोटे बछड़े का गंभीर एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उसका अगला पैर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मासूम नंदी महाराज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे, तभी गौ सेवक कल्लू महाराज को सूचना मिली। सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए घायल बछड़े को पशु चिकित्सालय पहुंचाकर भर्ती करवाया।

पशु चिकित्सालय में डॉक्टर अरविंद जाटव एवं उनकी टीम ने पूरी मेहनत और संवेदनशीलता के साथ छोटे नंदी महाराज का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद बछड़ा अब तीन पैरों के सहारे जीवन जीने को मजबूर है, लेकिन उसकी आंखों में जीने की उम्मीद आज भी दिखाई देती है। गौशाला में उसके खाने-पीने और उपचार की समुचित व्यवस्था की गई है।

गौ सेवक कल्लू महाराज ने पशु विभाग के डॉक्टरों की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि “आज के युग में डॉक्टर ही भगवान का दूसरा रूप हैं। चाहे इंसानों का इलाज हो या बेजुबान पशुओं का, डॉक्टर जीवन बचाने का सबसे बड़ा कार्य करते हैं।” उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में इंसानों का उपचार होता है, जबकि पशु चिकित्सालयों में बेजुबान जीवों को नया जीवन दिया जाता है। समाज को ऐसे डॉक्टरों का सम्मान करना चाहिए।

कल्लू महाराज ने भावुक होकर बताया कि उनकी गौशाला में ऐसे कई घायल गौवंश मौजूद हैं, जिनका किसी का आगे का पैर नहीं, तो किसी का पीछे का पैर दुर्घटनाओं में चला गया। वर्तमान में भी तीन गौवंश ऐसे हैं जो गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि “अगर जरूरत पड़ी तो हम इन मासूम गौवंशों को बैसाखी तक लगवाएंगे, लेकिन इन्हें मरने नहीं देंगे।”

उन्होंने समाज और जनप्रतिनिधियों से भी मार्मिक अपील करते हुए कहा कि सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाओं से गौवंश लगातार घायल हो रहे हैं। सांसद , केंद्रीय मंत्री  एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से गौशालाओं के निर्माण और “गौ माता बचाओ अभियान” चलाने की मांग की गई है।

गौ सेवक कल्लू महाराज ने अंत में कहा, “जीवन और मरण भगवान के हाथ में है, लेकिन हमारा धर्म हर बेजुबान को बचाने का प्रयास करना है। चाहे हमारी जान चली जाए, लेकिन गौ माता और उनके बच्चों को बचाने से पीछे नहीं हटेंगे। गौ सेवा ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है।”

यह दृश्य केवल एक घायल बछड़े की कहानी नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और करुणा का जीवंत उदाहरण है।

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