गौ सम्मान आह्वान अभियान “गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने” की मांग तेज, जन-जन से जुड़ने की अपील ।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 

गौ सम्मान आह्वान अभियान “गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने” की मांग तेज, जन-जन से जुड़ने की अपील ।

पिछोर। भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा के केंद्र में रही गौ माता के सम्मान और संरक्षण को लेकर “गौ सम्मान आह्वान अभियान” अब जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। गौ सेवा समिति के जिला अध्यक्ष कल्लू महाराज के नेतृत्व में यह अभियान न केवल नगर, बल्कि पूरे जिले में तेजी से फैल रहा है।

अशोक होटल, पिछोर तिराहे से प्रारंभ हुए इस जागरूकता अभियान के तहत कार्यकर्ताओं और गौ भक्तों ने पूरे नगर में जाकर लोगों को जागरूक किया और अपील की कि वे 27 अप्रैल को अपने-अपने तहसील, ब्लॉक, अनुमंडल और जिला कार्यालयों में पहुंचकर ज्ञापन सौंपें। यह ज्ञापन तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम भेजा जाएगा।

अभियान का मुख्य उद्देश्य संविधान के दायरे में रहकर अहिंसक तरीके से केंद्र और राज्य सरकारों से यह मांग करना है कि गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। इसके साथ ही गौ संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने, अनुसंधान व अनुदान बढ़ाने तथा गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।

कल्लू महाराज ने कहा कि गौ माता केवल एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे भारत की आस्था का केंद्र है। उन्होंने बताया कि भारतीय मान्यताओं के अनुसार गौ माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है और यह हमारे राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर है।

इस अभियान में दीपक तिवारी, जितेंद्र लोधी, राजू लोधी, जयराम लोधी, महेश पाल, छोटू पाल, रोहित लोधी, मैथिलीशरण गुप्त, चंद्रशेखर गुप्ता, मुकुल कंथारिया, रविकांत गुप्ता, मनोज झा, आशीष गेंडा, भूरा लोधी, सत्येंद्र सिंह बुंदेला, बुद्ध सिंह यादव, बल्ली यादव, अजय लोधी, जितेंद्र योगी, दीपक लोधी सहित अनेक गौ भक्त सक्रिय रूप से शामिल रहे।

अभियान के अंतर्गत लोगों से यह भी आग्रह किया गया कि वे अधिक से अधिक हस्ताक्षर कर इस जनआवाज को मजबूत बनाएं, क्योंकि “आपका एक हस्ताक्षर गौ माता को राष्ट्रीय पशु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।”

अंत में आयोजकों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाला राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। “घर बैठने से नहीं, आगे बढ़कर योगदान देने से ही गौ माता को वह सम्मान मिल सकेगा, जिसकी वह अधिकारी हैं।”

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