सस्पेंड सीएमओ की मनमानी: शासन आदेश के विपरीत स्टे पर रुके, एक ही फंडा- मनीराम नपाध्यक्ष मेले के खिलाफ, गांधीजी की दम पर सीएमओ ने लगवाया पहले निरस्त किया, रेट बढ़वाया, फिर परमीशन दे दी ।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी

समाचार 

सस्पेंड सीएमओ की मनमानी: शासन आदेश के विपरीत स्टे पर रुके, एक ही फंडा- मनीराम नपाध्यक्ष मेले के खिलाफ, गांधीजी की दम पर सीएमओ ने लगवाया पहले निरस्त किया, रेट बढ़वाया, फिर परमीशन दे दी ।

शहर विकास की जगह जंग का अखाड़ा बन चुकी 

नगरपालिका में जो सीएमओ मनमानी पर उतारू है, 

शासन की ओर से निलंबित होकर न्यायालय से स्टे पर है। 

यानि मामला फिफ्टी/फिफ्टी होने की वजह से अब फोकस केवल मनीराम पर है। 

नपाध्यक्ष भी खफा होकर दो बार कलेक्टर से शिकायत कर चुकी हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस मेले को सस्पेंडेड सीएमओ ने 23 मार्च को निरस्त किया,  

26 मार्च को उक्त मेले की परमीशन दे दी। महत्वपूर्ण बात यह है कि उक्त मेले को नवदुर्गा महोत्सव मेले के नाम से लगाया जा रहा है। 

नवरात्रि तो 27 मार्च को ही खत्म हो गई। 

सीएमओ की कोई जिद है, या फिर गांधी जी का जोर. 

 समझ से परे है

नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा ने नपा कार्यालय के कैमरे में हुई रिकॉर्डिंग में सीएमओ को न केवल खरी खोटी सुनाती दिख रही हैं, 

बल्कि उनके अभी तक रुके रहने के पीछे खुद का बैक सपोर्ट बताया। 

नपाध्यक्ष अभी तक सीएमओ को रोके रहीं (जैसा वो कह रही है), तो क्या अब उनकी नैया डुबो देंगी?। 

आज उनका एक वीडियो देखा, जिसमें वो बोल रही हैं कि मीडिया से लेकर कलेक्टर तक मुझसे पूछ रहे हैं कि गांधी पार्क में मेला कैसे लग रहा है?, उसे सीएमओ अपनी मनमानी करके लगवा रहे हैं। 

नियमों को ताक ओर रखकर लगाया मेला 

गांधी पार्क के जिस मेले को सीएमओ ने ही निरस्त किया,

तीन दिन बाद उसी मेले को लगाने की परमीशन दे दी। जिसकी खबर में रेत भी खोल दिया । 

17 लाख से अधिक मिले हैं नपा को, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी अभी भी छुपी हुई है।

ठेकेदार की माल लोडिंग-अनलोडिंग में लगभग 10 लाख रुपए खर्च हो गए, तो फिर उसने मुंहमांगा पैसा दिया। 

शिवपुरी का प्राचीन सिद्धेश्वर मेला फेल हो जाए। एक मेले में खरीदारी करने के बाद फिर तत्काल दूसरे मेले में लोग नहीं जाते। 

स्टे पर की वकीलों से चर्चा: ए

एडवोकेट महेंद्र शर्मा ने बताया कि स्टे लिमिटेड या फिर मामला निराकृत होने तक का मिलता है। 

नपा के एडवोकेट गिरीश गुप्ता ने कहा कि मुझे इस संबंध में जानकारी नहीं है। 

एडवोकेट अभय जैन ने बताया कि स्टे में भी समय-समय पर तारीख लगती हैं, लेकिन सरकारी वकील उसकी तारीख आगे बढ़वाते रहते हैं। 

राज्य सरकार चाहे तो अपना पक्ष रखकर स्टे को खत्म करवा सकती है।

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