शिवपुरी - मिट्टी का कर्ज कुछ ऐसे चुकाया, खुद को मिटाकर देश को बचाया,, मंगल पांडे ब्रिटिश सेना में थे पर उनकी आत्मा हिंदुस्तान की थी।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 



समाचार 

 वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन ने मंगल पांडे को दी श्रद्धांजलि, 

क्रांति की पहली गोली का नाम था  मंगल पाण्डे - कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा 

शिवपुरी - मिट्टी का कर्ज कुछ ऐसे चुकाया, खुद को मिटाकर देश को बचाया,, मंगल पांडे ब्रिटिश सेना में थे पर उनकी आत्मा हिंदुस्तान की थी। 

जब जबरदस्ती थमाया गया चर्बी वाला कारतूस तो धर्म और स्वाभिमान दोनों लहू लुहान हो गए। 

उन्होंने सवाल नहीं किया, बस उठ खड़े हुए, गुलामी के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ। 

29 मार्च 1857को बैरकपुर के मैदान में अकेले अंग्रेजी सत्ता से टकरा गए। 

 8 अप्रैल को मंगल पांडे को फांसी दे दी गई, उससे पहले वह आजादी का विचार बन चुके थे।

 यह बात  प्रदेश कोऑर्डिनेटर एवं

जिला अध्यक्ष कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा ने प्रथम क्रांतिवीर मंगल पांडे को श्रद्धांजलि देते हुए  इंडियन वेटरन्स ऑर्गनाइजेशन की बैठक में कही।

उन्होंने कहा कि मंगल पांडे हमें आजाद होने की वजह दे गए ।

जब मंगल पांडे को यह पता चला कि कारतूस का इस्तेमाल करने से पहले मुंह से उसको खोलना पड़ता है। 

गाय की चर्बी लगाई जाती है, और गाय हमारे लिए मां जैसी है, कोई हमारी मां की हत्या करें, फिर उसकी चर्बी लगा हुआ कारतूस मुंह से खोलने पड़े, तो यह शर्म से डूब मरने की बात है। 

मंगल पांडे ने अपने अधिकारी से एक प्रश्न किया कि क्या कारतूसों पर गाय की चर्बी का लेपन किया जाता है? अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया।

उनके पास उनकी सर्विस राइफल थी उन्होंने ह्यूशन को गोली मार दी। ह्यूसन  मर गया, तीन घायल हो गए। बाद में दो मर गए।

उपाध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा मंगल पांडे का जन्म भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवां गांव मे एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे था। मंगल पांडे एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। जिन्होंने 1857 में प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

कोषाध्यक्ष विशाल जोशी ने कहा कि मंगल पांडे  ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल इन्फेंट्री के सिपाही थे। भारत सरकार द्वारा उनके सम्मान में सन 1984 में एक डाक टिकट जारी किया गया। मंगल पांडे ने गाय की चर्बी मिले कारतूस को मुंह से काटने से मना कर दिया। फल स्वरुप उन्हें गिरफ्तार कर 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई।

इस अवसर पर जिला अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश शर्मा, उपाध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा, शहर उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राजावत, कोषाध्यक्ष विशाल जोशी, कोऑर्डिनेटर बृजेश राठौर, वेटरन कैलाश सिंह जादौन, वेटरन ताज भान सिंह परमार, वेटरन मनोज दीक्षित, वेटरन शिव कुमार समाधिया, वेटरन जितेंद्र सिंह जाट, वेटरन मनोज कुमार शर्मा उपस्थित रहे। संचालन बृजेश कुमार राठौर ने किया। उपाध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

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