स्व-सहायता समूह से जुड़कर इंद्रा जाटव बनीं आत्मनिर्भर, समूह बने स्वरोजगार का माध्यम। शिवपुरी, 15 अप्रैल 2026

न्यूज चाचा का धमाका

सफलता की कहानी

स्व-सहायता समूह से जुड़कर इंद्रा जाटव बनीं आत्मनिर्भर,

समूह बने स्वरोजगार का माध्यम।

शिवपुरी, 15 अप्रैल 2026 

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़कर ग्राम धुवानी, विकासखण्ड शिवपुरी निवासी इंद्रा जाटव ने अपने जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत की है।

इंद्रा जाटव का जन्म एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। उनके माता-पिता के पास सीमित कृषि भूमि होने के कारण परिवार का पालन-पोषण कठिनाई से होता था। परिवार की बड़ी संतान होने के बावजूद आर्थिक अभाव के कारण वे केवल आठवीं कक्षा तक ही शिक्षा प्राप्त कर सकीं और तत्पश्चात उनका विवाह कर दिया गया। विवाह के बाद भी सीमित संसाधनों के साथ मजदूरी एवं कृषि कार्य के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा।

वर्ष 2016 में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गांव में स्व-सहायता समूह गठन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई, जिससे प्रेरित होकर इंद्रा जाटव ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर “बांकडे बाबा स्व-सहायता समूह” का गठन किया और समूह की अध्यक्ष चुनी गईं। समूह से जुड़ने के पश्चात उन्होंने आरसेटी (त्ैम्ज्प्) से सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए। प्रारंभ में उन्होंने स्कूल गणवेश सिलाई कार्य के माध्यम से आय अर्जित की, जिसमें उन्हें क्रमशः ₹18,000, ₹24,000 एवं ₹15,000 की आय प्राप्त हुई। वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग ₹750 तक की आय सिलाई कार्य (सूट, ब्लाउज, पेटीकोट आदि) के माध्यम से अर्जित कर रही हैं। समूह से जुड़ने के बाद उनकी व्यक्तिगत मासिक आय लगभग ₹12,500 तथा परिवार की मासिक आय लगभग ₹20,000 तक पहुंच गई है। वे वर्तमान में “लखपति दीदी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं तथा अपने ग्राम संगठन की अध्यक्ष एवं सीएलएफ की उपाध्यक्ष के रूप में नेतृत्व कर रही हैं।



एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने