पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का वनवास खत्म हो सकता है।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी

समाचार 

पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का वनवास खत्म हो सकता है।

दतिया विधानसभा सीट से विधायक राजेंद्र भारती को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अगर उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली तो वहां उपचुनाव तय है।  

नरोत्तम मिश्रा को पार्टी वहां से उम्मीदवार बना सकती हैं। नरोत्तम मिश्रा लंबे समय से मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स के साइड हैं। 

दूसरी चर्चा हैं कि ग्वालियर-चंबल अंचल में सवर्णों को साधने के लिए पार्टी नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भी भेज सकती है।  

विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए दो सीटें सत्ताधारी दल भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय है।

कांग्रेस की ओर से फिलहाल अशोक सिंह राज्यसभा में अंचल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वहीं भाजपा के भीतर उम्मीदवारों के चयन को लेकर गहरा मंथन चल रहा है। 

इस बीच, राजनीतिक गलियारों में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम को लेकर चर्चाएं बेहद गर्म हैं। 

नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी के पीछे सबसे बड़ा कारण यूजीसी अधिनियम को लेकर सवर्णों, विशेषकर ब्राह्मण समाज में पनप रही नाराजगी को माना जा रहा है। 

ग्वालियर-चंबल अंचल इस विरोध का मुख्य केंद्र बना हुआ है 

नरोत्तम मिश्रा न केवल इस अंचल में बल्कि पूरे प्रदेश में ब्राह्मण समाज का एक प्रभावशाली चेहरा हैं। 

भाजपा नेतृत्व को लगता है कि उन्हें उच्च सदन भेजकर सवर्ण समाज के गुस्से को शांत किया जा सकता है, जो आगामी नगरीय निकाय और अन्य चुनावों में पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। 

अनुसूचित और पिछड़ा वर्ग को साधने के साथ-साथ सवर्णों के बीच संतुलन बनाए रखना भाजपा के लिए फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

नरोत्तम मिश्रा को सक्रिय राजनीति में वापस लाने के लिए संगठन के पास राज्यसभा के अलावा एक और विकल्प भी है। 

दतिया विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक कानूनी मामले में सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता पर संकट मंडरा रहा है।

दतिया में उपचुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। पार्टी के भीतर एक खेमा ऐसा भी है जिसका मानना है कि नरोत्तम मिश्रा को फिलहाल 'आरक्षित कोटे' में रखा जाए। 

दतिया में उपचुनाव की स्थिति बनती है, तो उन्हें वहां से चुनाव लड़वाकर फिर से मोहन यादव सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, क्योंकि वे लंबे समय तक सरकार में संकटमोचक की भूमिका निभाते रहे हैं।

मामला कानूनी पेच और कोर्ट के फैसलों पर टिका हुआ है। 

यूजीसी अधिनियम पर कोर्ट का अंतिम रुख और दतिया उपचुनाव की संभावना ही नरोत्तम मिश्रा का भविष्य तय करेगी। 

उपचुनाव में देरी होती है या परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहती हैं, 

भाजपा सवर्णों के राजनीतिक गुस्से को ठंडा करने के लिए उन्हें राज्यसभा भेजने का दांव चल सकती है।  #MPKiBaat #narottammishra #datiaupchunav  #RajyaSabha #MPPolitics #BJP4IND #narottammishranews

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