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Jitendra Jain Jila Shivpuri
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दिनारा में फायर ब्रिगेड नहीं 40 गांवों की सुरक्षा भगवान भरोसे, ग्रामीणों का प्रशासन को अल्टीमेटम।
शिवपुरी जिले की सबसे बड़ी पंचायत मानी जाने वाली दिनारा आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गंभीर संकट का सामना कर रही है। कागजों में नगर पालिका घोषित होने के बावजूद यहां आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक भी फायर ब्रिगेड उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप दिनारा सहित आसपास के लगभग 35 से 40 गांव हर साल गर्मियों में भय और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं।समाजसेवी एवं गौ सेवक कल्लू महाराज ने शासन-प्रशासन की लापरवाही पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्षेत्र में कई बार दुकानों, गुमटियों, खेतों और घरों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन हर बार स्थानीय स्तर पर कोई व्यवस्था न होने के कारण करेरा नगर पालिका से फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ती है, जिसमें कई घंटे लग जाते हैं। तब तक पीड़ितों की पूरी संपत्ति जलकर राख हो जाती है और वे जीवन भर की कमाई खो बैठते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आग की घटनाओं में केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी और मानव जीवन भी खतरे में पड़ जाते हैं। ऐसे में यह केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा का सवाल बन चुका है।
स्थानीय समाजसेवी आनंद बेडवार का पानी टैंकर ही कई बार आग बुझाने का एकमात्र सहारा बनता है, जो प्रशासन की विफलता को साफ दर्शाता है।
कल्लू महाराज ने जिला कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी, करेरा एसडीएम और क्षेत्रीय विधायक रमेश खटीक से मांग की है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए तत्काल दिनारा में फायर ब्रिगेड की व्यवस्था की जाए*। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मांग को पूरा नहीं किया गया, तो क्षेत्र के ग्रामीण सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हो, तभी शायद उनकी नींद खुलेगी।
दीपक तिवारी, जितेंद्र लोधी, राजू लोधी, रामबीर लोधी, छोटू पाल, पवन लोधी, ललित योगी, अरविंद साहू, बल्लू साहू, नाथू शर्मा, राम बिहारी शर्मा, आशीष गुप्ता, मैथिलीशरण गुप्त, चंद्रशेखर गुप्ता, मनोज झा, दिनेश झा, दीपक केवट, दीपक लोधी, सतीश गुप्ता सहित अनेक ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग उठाई है कि दिनारा में फायर ब्रिगेड की तत्काल व्यवस्था की जाए।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार करेगा या समय रहते जागकर 40 गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा*
