जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
जब पत्रकार ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा?
शिवपुरी खाद्य विभाग में 'सिंडिकेट' राज: वार्ड 18 के डीलर और विभाग के बाबू-ऑपरेटर की जुगलबंदी आई सामने
शिवपुरी। जिले के नगर क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है।
ताज़ा मामला वार्ड क्रमांक 18 का है,
जहाँ राशन के बदले पैसे बांटने का खेल चल रहा है।
इस धांधली को उजागर करने पहुँचे एक स्थानीय पत्रकार के साथ खाद्य विभाग के दफ्तर में जो व्यवहार हुआ,
वह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कलंक के समान है।
डीलर का रिश्वतनामा: "गेहूं नहीं मिलेगा, विभाग को ₹2000 दे दिए हैं"
वार्ड 18 के राशन डीलर का एक सनसनीखेज ऑडियो प्रमाण सामने आया है
जिसमें वह पत्रकार से सीधे तौर पर कह रहा है
गेहूं नहीं मिलेगा,
सिर्फ पैसे मिलेंगे।
मैंने अभी ऑफिस जाकर ₹2000 की रिश्वत दी है।
यह ऑडियो स्पष्ट करता है
सरकारी अनाज को बाजार में बेचकर भ्रष्टाचार की मलाई ऊपर तक पहुँचाई जा रही है।
विभाग में 'सेटिंग' का खेल: बाबू और ऑपरेटर की संदिग्ध भूमिका
जब इस ठोस साक्ष्य (ऑडियो) के साथ पत्रकार खाद्य विभाग के कार्यालय पहुँचा, तो वहां न्याय के बजाय भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलता दिखा:
बाबू का गैर-जिम्मेदाराना जवाब: कार्यालय के बाबू ने यह कहकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की
लिखित शिकायत दे जाओ,
जांच करवा लेंगे,
इन रिकॉर्डिंग से कुछ नहीं होता।"
यह बयान सीधे तौर पर आरोपी डीलर को बचाने की कोशिश है।
ऑपरेटर की 'मैनेजमेंट' की कोशिश: जब कंप्यूटर ऑपरेटर से नगर निरीक्षक का मोबाइल नंबर मांगा गया,
तो उसने नंबर देने से साफ मना कर दिया। उल्टे, उसने फतेहपुर की एक दुकान पर फोन लगाकर पत्रकार को वहां से राशन दिलाने की 'सेटिंग' करने की कोशिश की।
दुकान पर ताला और बहानेबाजी: ऑपरेटर के कहने पर जब पत्रकार अगले दिन राशन लेने पहुँचा,
तो वह दुकान भी बंद मिली और वहां मौजूद व्यक्ति ने बहाना बनाया कि"पिताजी गोदाम से राशन लेने गए हैं, परसों आना।"
एक पत्रकार की गुहार: "जनता का हाल क्या होगा?"
पीड़ित पत्रकार का कहना है कि जब विभाग के भीतर एक मीडियाकर्मी के साक्ष्यों को इस तरह नकारा जा रहा है
उसे गुमराह किया जा रहा है, तो
आम गरीब जनता की क्या स्थिति होगी? यह साफ है कि
शिवपुरी नगर की राशन दुकानों पर एक सुव्यवस्थित 'सिंडिकेट' काम नही चल रहा है,
जिसे विभाग के कुछ कर्मचारियों का मौन समर्थन प्राप्त है।
प्रशासन को चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम और साक्ष्यों के आधार पर जिला कलेक्टर से मांग की गई है
केवल वार्ड 18 के डीलर पर एफआईआर (FIR) दर्ज हो
बल्कि विभाग के उन बाबू और ऑपरेटर की भी जांच की जाए
जो भ्रष्टाचार की ढाल बने हुए हैं।
यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई,
पत्रकार जगत और स्थानीय नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
