न्यूज चाचा का धमाका
जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
देशभर में कई निजी स्कूलों द्वारा हर साल “री-एडमिशन” के नाम पर फीस लेने का मुद्दा फिर चर्चा में है।
अभिभावकों का सवाल है कि जब बच्चा उसी स्कूल में लगातार पढ़ रहा है,
सुविधाएं वही हैं, स्टाफ और प्रशासन वही है, तो हर साल दोबारा एडमिशन फीस क्यों ली जाती है?
माता-पिता का कहना है कि एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्ज, और अन्य अलग-अलग शुल्क के नाम पर हजारों रुपये वसूले जाते हैं,
जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
उनका मानना है कि यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं, बल्कि पारदर्शिता और न्याय का सवाल है।
वहीं, कुछ स्कूल प्रबंधन का तर्क होता है कि मेंटेनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक खर्चों के लिए ये शुल्क आवश्यक हैं।
लेकिन अभिभावक मांग कर रहे हैं कि शुल्क संरचना स्पष्ट, पारदर्शी और नियमबद्ध हो।
अब यह मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर बहस का रूप ले चुका है।
