नरवर की लोढ़ी माता, कच्चे धागे पर नृत्य करते हुए किले पर पहुंचने से पहले काटा था सूत ।




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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 

नरवर की लोढ़ी माता, कच्चे धागे पर नृत्य करते हुए किले पर पहुंचने से पहले काटा था सूत ।

नरवर था जादूगरों का नगर,

धागे पर चलने से पहले जादू से बांध दिए थे सभी हथियार, मोची की रापी से काटा था धागा ।

शिवपुरी के इतिहासकार एवं नरवर के पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष मनोज माहेश्वरी ने बताया कि बंगाल के जादूगर भी पहले नरवर का नाम लेते हैं,

नरवर जादूगरों की नगरी थी। 

वकील माहेश्वरी, लोढ़ी माता बहुत बड़ी जादूगरनी थी। उसने नरवर के राजा नल से यह शर्त रखी थी कि मैं किले के सामने स्थित पहाड़ी पर बने मंदिर से किले तक कच्चे धागे पर नृत्य करती हुई आउंगी।

राजा का पूरा राज्य उस जादूगरनी का हो जाएगा। इसी शर्त के आधार पर जादूगरनी ने पहाड़ी के मंदिर से कच्चे धागे पर नृत्य करते हुए नरवर किले की तरफ कदम बढ़ाए। 

इस दौरान जादूगरनी ने अपने तंत्र मंत्र से सभी हथियार बांध दिए थे, लेकिन मोची (जूते-चप्पल रिपेयर करने वाला) की रापी को नहीं बांधा था।  

जादूगरनी किले के नजदीक पहुंचने वाली थी, तभी धागे को रापी से काट दिया। धागा कटते ही जादूगरनी नीचे गिरी और वहीं खत्म हो गई। नरवर किले के पास जिस जगह वो गिरी, उसी जगह मंदिर बनाकर उसे लोढ़ी माता का नाम दिया गया। 

माहेश्वरी बताते हैं कि इस मंदिर पर आने वाली महिलाओं को औलाद का सुख मिलता है, तथा मानसिक रूप से परेशान महिलाओं को यहां आने पर आराम मिलता है। यह भी कहा जाता है कि जिस महिला ने एक बार यहां का प्रसाद खा लिया, तो फिर उसे मन्नत पूरी होने के बाद फिर आना पड़ता है, तथा घर परिवार में किसी भी खुशी के मौके पर लोढ़ी माता को प्रसाद चढ़ाना पड़ता है

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