पोहरी महाविद्यालय में एक दिवसीय अल्पविराम कार्यशाला में आनंद, जीवन-संतुलन और रिश्तों पर हुआ आत्ममंथन।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी

समाचार 


पोहरी महाविद्यालय में एक दिवसीय अल्पविराम कार्यशाला में आनंद, जीवन-संतुलन और रिश्तों पर हुआ आत्ममंथन।

पोहरी। तेज रफ्तार जिंदगी, लगातार बढ़ती व्यस्तताओं और बदलती जीवनशैली के बीच आज की युवा पीढ़ी के लिए कुछ पल ठहरकर स्वयं को देखना भी जरूरी है।

लक्ष्मी सरस्वती गोपाल कृष्ण महाविद्यालय, पोहरी में राज्य आनंद संस्थान, आनंद विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय ‘अल्पविराम परिचय कार्यशाला’ आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने जीवन की भागदौड़ के बीच ठहरकर अपने आनंद, जीवन-संतुलन और रिश्तों को नए नजरिए से देखने का प्रयास किया।

कार्यशाला का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राध्यापक लक्ष्मी गुप्ता ने प्रार्थना के साथ किया। इसके बाद राज्य आनंद संस्थान का परिचय मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने कराया। उन्होंने संस्थान की अवधारणा एवं उद्देश्यों से प्रतिभागियों को परिचित कराते हुए ‘अल्पविराम’ की मूल भावना को समझाया। उन्होंने कहा कि आनंद बाहर की सुविधाओं में नहीं, बल्कि हमारे भीतर मौजूद है। जरूरत है कि हम जीवन में एक अल्पविराम लेकर उसे देखने और महसूस करने का प्रयास करें।

कार्यशाला के अगले सत्र में आनंदम सहयोगी गरिमा दुबे ने प्रतिभागियों से ‘मेरे जीवन में आनंद क्या है और वह कैसे बढ़ता तथा घटता है’ जैसे प्रश्नों पर संवाद किया। इन प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने भीतर झांकने और अपने आनंद के स्रोतों को पहचानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि हमारे आनंद की चाबी हमारे अपने हाथ में होनी चाहिए, किसी दूसरे के हाथ में नहीं।

इसके बाद आनंदम सहयोगी सुषमा कन्नौजी ने ‘लाइफ बैलेंस शीट’ के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने जीवन का लेखा-जोखा तैयार कराया। चार प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों ने यह देखने का प्रयास किया कि उनका जीवन लाभ में चल रहा है या हानि में। उन्होंने बताया कि मदद, कृतज्ञता, क्षमा मांगना और क्षमा करना जैसे मूल्य जीवन को लाभ की ओर ले जाते हैं और व्यक्ति को भीतर से आनंदित रखते हैं।

कार्यशाला के अगले सत्र में आनंदम सहयोगी ब्रजेश सिंह तोमर ने जीवन में रिश्तों के महत्व पर संवाद किया। उन्होंने रिश्तों के मधुर होने तथा उनके कमजोर या टूटने के कारणों पर प्रतिभागियों को अल्पविराम देकर अपने रिश्तों को समझने और उन्हें मजबूत बनाने का अवसर दिया। उन्होंने अल्पविराम के माध्यम से अपने जीवन में बेहतर हुए रिश्तों के अनुभव भी प्रतिभागियों के साथ साझा किए।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव एवं फीडबैक साझा किए। प्रतिभागियों ने कहा कि कार्यशाला ने उन्हें रोजमर्रा की तेज रफ्तार जिंदगी में कुछ पल ठहरकर स्वयं से संवाद करने, अपने आनंद की जिम्मेदारी समझने और रिश्तों को बेहतर तरीके से जीने का अवसर दिया।

कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि जीवन चाहे कितना भी तेज क्यों न हो, कभी-कभी लिया गया एक छोटा-सा ‘अल्पविराम’ हमें खुद से, अपने आनंद से और अपने रिश्तों से दोबारा जोड़ सकता है।

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