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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
पिछोर विधानसभा प्लांटेशन में भ्रष्टाचार की आशंका! लाखों के खर्च का हिसाब कौन देगा?
दीवार की माप से लेकर गड्ढों, खाद, कीटनाशक और निरीक्षण पथ तक उठे सवाल; वन विभाग से छह बिंदुओं पर जवाब की मांग
शिवपुरी, मध्य प्रदेश।
वन परिक्षेत्र पिछोर की बीट गड़रोली के अंतर्गत ग्राम कछुआ के पास स्थित वन क्षेत्र में प्लांटेशन के कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहे हैं।
प्लांटेशन में कराए गए निर्माण, पौधरोपण की तैयारी, सामग्री की खरीदी और मजदूरों के लिए की गई व्यवस्थाओं पर पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
सवाल यह है
यदि कार्यों पर सरकारी राशि खर्च की गई है, तो उसका भौतिक सत्यापन और भुगतान का पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाए?
छह बिंदु, जिनकी जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
1. सुरक्षा दीवार की माप और भुगतान कितना?
प्लांटेशन की सुरक्षा के लिए दीवार बनवाई गई है तो उसकी कुल लंबाई, ऊंचाई और मोटाई कितनी है? निर्माण की माप पुस्तिका (एमबी), स्वीकृत दर, कुल भुगतान और मौके पर मौजूद निर्माण का मिलान कराया जाए।
2. गड्ढों की संख्या और खाद-मिट्टी का हिसाब क्या है?
पौधरोपण के लिए कितने गड्ढे खोदे गए और प्रत्येक गड्ढे का निर्धारित आकार क्या था? क्या उनमें नियमानुसार खाद और मिट्टी डाली गई? इसकी पुष्टि भौतिक सत्यापन और संबंधित अभिलेखों से कराई जाए। कीटनाशक किस दुकान से खरीदा गया, कितनी मात्रा खरीदी गई और कितनी राशि का भुगतान हुआ—इन सवालों का जवाब भी जरूरी है।
3. निरीक्षण पथ बना या केवल कागजों में दर्ज है?
यदि निरीक्षण पथ का निर्माण कराया गया है, तो उसकी लंबाई, चौड़ाई, निर्माण लागत और वर्तमान स्थिति का खुलासा किया जाए। मौके पर निर्माण और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान होना चाहिए।
4. मजदूरों की झोपड़ी कहां बनाई गई?
प्लांटेशन स्थल पर मजदूरों के ठहरने के लिए झोपड़ी या अस्थायी व्यवस्था की गई थी तो उसका स्थान, लागत और उपयोग संबंधी रिकॉर्ड सामने लाया जाए।
5. पौधों के थालों की माप क्या है?
पौधों के आसपास बनाए गए थालों का निर्धारित आकार क्या था? कितने पौधों के थाल बनाए गए और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है? इसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
6. प्लांटेशन के लिए स्थल का चयन किसने किया?
प्लांटेशन की साइट किस अधिकारी या समिति ने चुनी? क्या स्थल का निरीक्षण किया गया था? चयन संबंधी प्रस्ताव, स्वीकृति और निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की मांग
इन सवालों का उद्देश्य किसी को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। संबंधित वन अधिकारियों से मांग है कि स्वीकृत कार्यों, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, सामग्री खरीदी, मजदूरी भुगतान और पौधरोपण के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग मौके पर स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराकर वास्तविक खर्च और निर्माण की स्थिति स्पष्ट करेगा? यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

