न्यूज़ चाचा का धमाका
जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
मां की गोद में दूधमुंहा बच्चा, सड़क पर कलह और डायल-112 ने की ‘लोकेशन चेंज'।
शुक्रवार सुबह 10 बजे जिला अस्पताल के सामने का नजारा सिस्टम के मुंह पर तमाचा था। करौंदी की एक महिला अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर बीच सड़क पर धरने पर बैठ गई। उसका आरोप था कि, पति दूसरी महिला के साथ रहने लगा है, थाने पर शिकायत के बाद भी सुनवाई कहीं नहीं हुई। हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ, भीड़ जुटी, जाम लगा, तब जाकर डायल-112 आई। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वो डायल-112 की ट्रेनिंग मैनुअल पर ही सवाल खड़ा कर गया। पुलिस ने महिला को समझाया-बुझाया और अस्पताल गेट से उठाकर तात्याटोपे पार्क में बिठा दिया। बस! कहानी खत्म। न कानूनी मदद, न थाने तक मदद।
बाक्स
क्या कहते हैं नियम
डायल-112 सिर्फ पीआरवी वैन नहीं, इंटीग्रेटेड इमरजेंसी सिस्टम है। मध्यप्रदेश में 100, 108, 101, 1090, 181, 1098 सबको 112 में इंटीग्रेट किया गया है। यानी एक काल पर पुलिस, एंबुलेंस, महिला हेल्पलाइन सबकी मदद मिलनी चाहिए।
महिला से जुड़ी हर काल को डब्ल्यूसीडी कंट्रोल रूम में पुश करने का नियम है। सरकार के अनुसार सभी महिला और बच्चों से जुड़ी काल्स को डब्ल्यूसीडी कंट्रोल रूम में भेजा जाता है, जहां जरूरत पड़ने पर 181 महिला हेल्पलाइन और 1098 चाइल्ड लाइन पर काउंसलिंग के लिए ट्रांसफर किया जाता है।
रेस्क्यू का मतलब थाने और काउंसलिंग है, पार्क नहीं।
बाक्स
क्या कहता है एसओपी
स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजन के अनुसार रेस्क्यू किए गए व्यक्ति को स्थानीय थाने ले जाया जाए और पीड़ित को साइको-सोशल काउंसलिंग दी जाए। साथ ही वन स्टाप सेंटर (सखी) के तहत पुलिस फैसिलिटेशन, मेडिकल एड, लीगल एड, काउंसलिंग और पांच दिन तक अस्थायी शेल्टर तक देना अनिवार्य है।
बाक्स
यहां क्या हुआ?
न पीड़िता को महिला थाने ले जाया गया, न 181 से कनेक्ट किया गया, न वन स्टाप सेंटर सखी की मदद दिलाई गई, न घरेलू हिंसा और भरण-पोषण की शिकायत दर्ज कराई गई। सिर्फ लोकेशन बदली गई-अस्पताल गेट से पार्क। मानो समस्या अस्पताल गेट पर थी, महिला की जिंदगी में नहीं।
बाक्स
इनका कहना है
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है, मैं दिखवाता हूं कि, मामला क्या था। डायल-112 के स्टाफ से पता करता हूं, आखिर हुआ क्या था? इसी के बाद प्रकरण में उचित कार्रवाई की जाएगी।
रोहित दुबे
टीआई, कोतवाली
