सौर ऊर्जा और जैविक खेती से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने प्रगतिशील किसान श्री सुरेंद्र सिंह सेंगर।

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जीतेन्द जैन जिला शिवपुरी 


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सौर ऊर्जा और जैविक खेती से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने प्रगतिशील किसान श्री सुरेंद्र सिंह सेंगर।

कीकृत कृषि मॉडल: मछली पालन, बागवानी और 'मल्टी-क्रॉपिंग' से बढ़ी आय।

शिवपुरी, 30 अगस्त 2026/ बड़ौदी शिवपुरी के ग्राम बड़ागांव के प्रगतिशील कृषक श्री सुरेंद्र सिंह सेंगर ने अपनी मेहनत और आधुनिक सोच से कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मे एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने पारंपरिक खेती के तरीके को बदलकर अपने फार्म को एक आधुनिक और एकीकृत कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया है। आज उनका यह सफर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

श्री सुरेंद्र सिंह सेंगर की इस सफलता के पीछे सरकार की सौर ऊर्जा नीति का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्हें शासन की पीएम कुसुम योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर प्लांट की सुविधा प्राप्त हुई है। वह अपनी 04 हेक्टेयर भूमि में इस सोलर प्लांट की मदद से वे बिना किसी बिजली संकट या महंगे डीजल के, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों में सौर ऊर्जा का कुशलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी खेती की लागत में भारी कमी आई है।

बिजली के खर्च में हुई इस बचत का लाभ उठाते हुए श्री सेंगर ने अपने फार्म पर मल्टी-क्रॉपिंग (बहु-फसली चक्र) और कृषि-संबद्ध व्यवसायों को अपनाया है। इसके तहत उन्होंने अपने खेत के 1 बीघा क्षेत्र में एक उन्नत तालाब का निर्माण कराया है, जिसमें वे बड़े पैमाने पर पंगास मछली का सफल उत्पादन कर रहे हैं। यह मछली पालन इकाई न सिर्फ उनकी आय का एक मजबूत और नियमित स्रोत बन चुकी है, बल्कि इस तालाब की वजह से उनके पूरे खेत में सालभर आवश्यक नमी भी बनी रहती है, जिससे फसलों को भी लाभ होता है। यह इकाई पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त कमाई और जल संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।

फसलों के मामले में भी श्री सुरेंद्र सिंह ने परंपरा से अलग काम किया है। वे अपने फार्म पर बड़े पैमाने पर उन्नत किस्म के पपीता, नींबू और जामफल (अमरूद) जैसे बागवानी फलों सहित सब्जी का सफल उत्पादन कर रहे हैं। फलों की इन व्यावसायिक फसलों के साथ-साथ वे आधुनिक पद्धतियों का उपयोग करके धान की भी प्रचुर पैदावार ले रहे हैं, जिससे उनका पूरा फार्म सालभर हरा-भरा और मुनाफे से भरा रहता है।

सुरेंद्र सिंह का यह कृषि फार्म पूरी तरह से प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल काम कर रहा है। धरती की सेहत सुधारने और लोगों को रसायन मुक्त उत्पाद देने के लिए उन्होंने जैविक खेती को अपना मुख्य आधार बनाया है। वे अपने फार्म पर खुद ही वैज्ञानिक विधि से जीवामृत और अन्य जैविक खाद तैयार करते हैं, जिसके इस्तेमाल से उनके खेतों की मिट्टी की उर्वरा क्षमता लगातार बढ़ रही है।

कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने सराहा, अन्य किसानों के लिए प्रेरणा*

कृषक श्री सुरेंद्र सिंह सेंगर की इस बहुआयामी सफलता को देखकर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने उनके कृषि फार्म का जायजा लिया। फार्म पर संचालित मछली पालन, सौर ऊर्जा के उपयोग और जीवामृत की प्रक्रिया को बेहद करीब से देखने के बाद उन्होनेे इसकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिए जैविक खाद अत्यंत आवश्यक है। कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने क्षेत्र के अन्य सभी किसानों से भी अपील की कि वे रासायनिक खेती के स्थान पर श्री सेंगर की तरह जैविक कृषि और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं ताकि उनकी आय में भी इसी तरह वृद्धि हो सके।


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