न्यूज़ चाचा का धमाका
जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
“सालों तक काम लो और फिर सिर्फ संविदा कहकर अधिकारों से वंचित करो”—अब यह सोच अदालत के सामने टिक नहीं सकती!
सुप्रीम कोर्ट ने 04 अगस्त 2026 को Rupesh R. Gaonkar & Ors. बनाम State of Goa & Ors. मामले में लंबे समय से कार्यरत संविदा/अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा—
यदि कर्मचारी वर्षों तक लगातार आवश्यक और स्थायी प्रकृति का काम कर रहे हैं,
सरकार ने स्वयं उनकी सेवाओं को मान्यता दी है,
उन्हें अस्थायी दर्जा अथवा नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं दी हैं,
और सरकार ने नियमितीकरण की दिशा में कदम उठाए हैं,
तो बाद में अपनी ही प्रक्रियात्मक कमी का बहाना बनाकर कर्मचारियों को हमेशा संविदा पर नहीं रखा जा सकता।
सबसे महत्वपूर्ण बात:
कोर्ट ने यह भी माना कि पर्याप्त sanctioned vacant posts उपलब्ध न होने की स्थिति में भी आवश्यकतानुसार supernumerary posts बनाकर कर्मचारियों को नियमित किया जा सकता है।
कोर्ट ने संबंधित कर्मचारियों को 09 फरवरी 2021 से नियमित मानने, seniority, pension और अन्य retiral benefits देने का निर्देश दिया। हालांकि उस तारीख से फैसले की तारीख तक के वेतन-भत्तों के monetary arrears देने का आदेश नहीं दिया गया।
एक और महत्वपूर्ण संदेश—
सुप्रीम कोर्ट ने Umadevi के फैसले को लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के खिलाफ यांत्रिक तरीके से इस्तेमाल करने से सावधान किया और माना कि Umadevi सरकार को नियमितीकरण की नीति बनाने से नहीं रोकता।
यह फैसला हर उस कर्मचारी के लिए उम्मीद की किरण है, जिसने वर्षों तक सरकार और सरकारी संस्थानों के लिए अपना जीवन और जवानी समर्पित की है।
वर्षों की सेवा को सिर्फ “संविदा” शब्द के पीछे छिपाकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

