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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
सड़क पर दम तोड़ रही गौवंश की जिंदगी, बछड़े की मौत पर मां गाय का करुण विलाप।
शिवपुरी। दिनारा क्षेत्र के अशोक होटल-पिछोर तिराहे के पास बुधवार को एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक मासूम बछड़े की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर पहुंचे गौ सेवक कल्लू महाराज और अन्य लोगों ने जब बछड़े के शव को वहां से हटाने का प्रयास किया तो उसकी मां गाय बार-बार वाहन के आगे आकर रास्ता रोकती रही। यह मार्मिक दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मां गाय अपने मृत बछड़े से दूर होने को तैयार नहीं थी। वह बार-बार शव ले जा रहे लोगों के सामने आकर खड़ी हो जाती थी। मानो वह अपने बच्चे को अपने से दूर नहीं जाने देने की गुहार लगा रही हो। मां और बछड़े के इस रिश्ते का यह दृश्य इंसानियत को झकझोर देने वाला था।
गौ सेवक कल्लू महाराज ने वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा कि सड़क पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। तेज रफ्तार और थोड़ी सी लापरवाही किसी इंसान ही नहीं, बल्कि किसी बेजुबान जीव की जिंदगी भी छीन सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क पर घूमने वाले गौवंश की सुरक्षा के लिए समाज और प्रशासन को मिलकर गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है।
कल्लू महाराज ने गौवंश की स्थिति को लेकर सरकार और प्रशासन से स्थायी व्यवस्था की मांग उठाई। उनका कहना है कि कई लोग गाय के दूध देना बंद करने के बाद उसे सड़क पर छोड़ देते हैं। इसके बाद वही गौवंश दुर्घटनाओं, भूख और अन्य परेशानियों का शिकार होता है। उन्होंने जगह-जगह बेहतर गौशालाएं बनाने, उनकी नियमित देखरेख सुनिश्चित करने और बेसहारा गौवंश के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि गौ सेवा उनके लिए केवल दिखावा नहीं, बल्कि वर्षों से चला आ रहा संकल्प है। उनका दावा है कि वह करीब 25 वर्षों से गौ सेवा के कार्य में जुटे हैं और सड़क पर घायल या संकट में पड़े गौवंश की मदद करने का प्रयास करते रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से गौ सेवा से जुड़े जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को भी सहयोग देने की अपील की।
कल्लू महाराज ने कहा कि गौ माता की सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति, संगठन या सरकार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए वाहन चालकों, पशुपालकों, स्थानीय नागरिकों और प्रशासन सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। विशेषकर पशुपालकों से उन्होंने अपील की कि दूध देना बंद करने के बाद गौवंश को सड़कों पर छोड़ने के बजाय सुरक्षित व्यवस्था करें।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि गौशालाओं की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, चारे, उपचार और देखभाल की नियमित निगरानी की जाए। उनका कहना है कि केवल योजनाएं और कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
दिनारा की इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर घूमते गौवंश की सुरक्षा का गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। एक मासूम बछड़े की मौत और उसकी मां का शव के पीछे दौड़ना हर संवेदनशील व्यक्ति को यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़क पर बेजुबानों की जिंदगी बचाने के लिए आखिर हम अपनी जिम्मेदारी कब समझेंगे।