शिवपुरी के महर्षि महाविद्यालय की मान्यता पर बड़े सवाल, 2018 से छात्रों की इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल को लेकर जांच की मांग

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 


समाचार  

शिवपुरी के महर्षि महाविद्यालय की मान्यता पर बड़े सवाल, 2018 से छात्रों की इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल को लेकर जांच की मांग।

शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय, शिवपुरी की डीएलएड/बीएड संबंधी मान्यता और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों और लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र सरकारी जांच जरूरी है। पुराने उपलब्ध रिकॉर्ड में महर्षि महाविद्यालय, पोहरी रोड, सिंह निवास, शिवपुरी का उल्लेख मिलता है, लेकिन इससे वर्तमान में संस्था वास्तव में उसी स्थान पर संचालित हो रही थी या नहीं, यह अपने-आप साबित नहीं होता। �

मान्यता किस आधार पर दी गई?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि महर्षि महाविद्यालय को डीएलएड/बीएड की मान्यता देते समय निरीक्षण दल ने मौके पर क्या-क्या देखा?

यदि भवन, कक्षाएं, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, स्टाफ, विद्यार्थियों की उपस्थिति और अन्य निर्धारित सुविधाओं का निरीक्षण हुआ था तो उसकी निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

2018 से इंटर्नशिप का रिकॉर्ड कहां है?

आरोप है कि वर्ष 2018 से डीएलएड विद्यार्थियों की इंटर्नशिप को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुईं। सवाल यह है कि—

विद्यार्थियों की इंटर्नशिप किन विद्यालयों में कराई गई?

किस अधिकारी ने उसका सत्यापन किया?

इंटर्नशिप की उपस्थिति और मूल्यांकन रिकॉर्ड कहां है?

2025 में विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल किस स्थान पर और किन परीक्षकों की मौजूदगी में हुए?

विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं कहां संचालित हुईं?

फीस और छात्रवृत्ति की भी हो जांच

विद्यार्थियों से निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त बड़ी रकम लिए जाने के आरोपों की भी जांच आवश्यक है। प्रत्येक छात्र से ली गई फीस, रसीद, बैंक लेन-देन और कॉलेज के लेखा रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए।

इसी तरह विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति किस आधार पर स्वीकृत हुई, किस खाते में गई और कॉलेज की भूमिका क्या रही, इसका रिकॉर्ड भी जांच एजेंसी के सामने रखा जाना चाहिए।

₹100 के स्टांप पर किरायानामा—नियम क्या कहते हैं?

यदि महाविद्यालय के संचालन के लिए ₹100 के स्टांप पर नोटरीकृत किरायानामा प्रस्तुत किया गया है, तो यह भी जांच का विषय है कि मान्यता के समय संबंधित नियमों के अनुसार ऐसा दस्तावेज पर्याप्त था या नहीं, तथा निरीक्षण के दौरान वास्तविक कब्जा और भवन का भौतिक सत्यापन किया गया था या नहीं।

संचालक और प्राचार्य को लेकर भी सवाल

एक और गंभीर सवाल यह है कि महाविद्यालय के वास्तविक संचालक/प्रबंधन की जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से उपलब्ध क्यों नहीं है। साथ ही यदि एक ही व्यक्ति एक से अधिक डीएलएड महाविद्यालयों में प्राचार्य के पद पर दर्शाया गया है, तो संबंधित संस्थानों के नियुक्ति पत्र, सेवा रिकॉर्ड और नियामकीय अनुमति की जांच होनी चाहिए।

किस-किस पर कार्रवाई होगी?

सिर्फ कॉलेज प्रबंधन ही नहीं, बल्कि मान्यता देने, निरीक्षण करने, रिकॉर्ड सत्यापित करने और संबद्धता/परीक्षा प्रक्रिया में जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांची जानी चाहिए।

यदि जांच में जानबूझकर गलत दस्तावेज, फर्जी रिकॉर्ड, धोखाधड़ी या सरकारी पद का दुरुपयोग साबित होता है, तो तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। केवल आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करना उचित नहीं होगा।

जांच के लिए प्रमुख मांगें

① 2018 से अब तक की मान्यता और निरीक्षण फाइल सार्वजनिक हो।

② 2018–2025 की इंटर्नशिप का पूरा रिकॉर्ड जांचा जाए।

③ 2025 के प्रैक्टिकल सेंटर और परीक्षकों की जानकारी सामने लाई जाए।

④ विद्यार्थियों की कक्षाओं और उपस्थिति का सत्यापन कराया जाए।

⑤ फीस वसूली और छात्रवृत्ति का ऑडिट कराया जाए।

⑥ ₹100 के स्टांप वाले किरायानामे की वैधानिकता जांची जाए।

⑦ कॉलेज के संचालक, प्राचार्य और शिक्षण स्टाफ की वास्तविक नियुक्तियों की जांच हो।

⑧ मान्यता देने वाले निरीक्षण दल की जवाबदेही तय की जाए।

⑨ दोष सिद्ध होने पर संबंधित संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

**अब सवाल सिर्फ महर्षि महाविद्यालय का नहीं, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही का भी है।

जिन्होंने मान्यता और शैक्षणिक व्यवस्था को प्रमाणित किया। प्रशासन बताए—जांच कब शुरू होगी और रिपोर्ट कब तक सार्वजनिक होगी?**

अगर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता है to pil के लिए jaana hi hoga

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