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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
जनोंमुखी पत्रकारिता वक्त की जरूरत"- शलभ भदौरिया अर्जुन चंदेल का कटाक्ष "संविधान में कहीं प्रेस का नाम नहीं, फिर चौथा स्तंभ कैसे"।
नागदा।* मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ का एक दिवसीय सम्मेलन बुधवार को नागदा में स्थित रंगोली रिपोर्ट में गरिमामय माहौल में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राजेश रघुवंशी ने की। मंच पर विशेष अतिथि के रूप में विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र धाकड़, पूर्व विधायक जितेंद्र गहलोत, प्रख्यात मजदूर नेता सुल्तान सिंह शेखावत, नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि ओपी गेहलोत और अग्निपथ के संपादक अर्जुन सिंह चंदेल मौजूद रहे।
अग्निपथ के संपादक अर्जुन सिंह चंदेल ने तीखे और तल्ख लहजे में पत्रकारों को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि हम पत्रकार आत्ममुग्ध हैं कि हम लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं, जबकि हकीकत यह है कि 251 पृष्ठों के हस्तलिखित संविधान में कहीं भी प्रेस, मीडिया या पत्रकार का नाम तक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई बताए कि पत्रकारिता चौथा स्तंभ है, यह कहां लिखा है। चंदेल ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभ वेतन से लेकर पेंशन तक पाते हैं, पर पत्रकारिता के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। हां, मध्य प्रदेश सरकार ने जरूर 20 हजार रुपये की पेंशन की व्यवस्था की है,जिसे श्रद्धानिधि कहां जाता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि 20 हजार पेंशन लेने के बाद क्या सरकार की आंखों में आंखें डालकर सवाल कर पाओगे। उन्होंने पत्रकारिता में आई गिरावट पर गंभीर चिंता जताई।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शलभ भदौरिया ने अपने अंदाज में उद्बोधन की शुरुआत कर उपस्थित पत्रकारों को उत्साहित कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले से ही तीन प्रकार की पत्रकारिता होती रही है। एक सेठाश्रित पत्रकारिता है, एक राजाश्रित पत्रकारिता है और तीसरी जनोंमुखी पत्रकारिता है। आज के दौर में जनोंमुखी पत्रकारिता की जरूरत है। उन्होंने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि पत्रकारों की तारीफ करना नेताओं की मजबूरी है। परिवार का मुखिया होने के नाते मेरा यह दायित्व है कि मैं झूठी तारीफ न कर आप सबको आपकी कमियां बताकर उन्हें दूर करूं। भदौरिया ने कहा कि आजकल सरकार नारद जयंती मनाने लगी है तो नारद भी तो हम पत्रकारों के कुनबे के ही पत्रकार हैं। वे देव ऋषि थे फिर भी राक्षसों के बीच सम्मान पाते थे। उन्होंने कहा कि यदि नेता लोग हमें वास्तव में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानते हैं तो लोकसभा में प्रस्ताव पारित करें। अभी पत्रकार उसी अभिव्यक्ति की आजादी के तहत समाचार लिखते हैं जो आजादी आम लोगों को भी मिली हुई है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में चुनौतियों के बाद भी पत्रकारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से पत्रकारों की आलोचना करते हुए कहा कि जब हम अपना काम करते समय राष्ट्रीयता का भाव रखते हैं तो वह हमारे काम के साथ साथ राष्ट्रीय कार्य हो जाता है। पूर्व विधायक जितेंद्र गहलोत ने कहा कि जो आप दिखाते हैं वह एक पक्ष है और उसका दूसरा पक्ष भी होता है। वहीं एक मजदूर नेता ने संगठन से जुड़े पत्रकार साथियों को सहकारिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम में शासन एवं संगठन समन्वय समिति सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र पुरोहित, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र राठौर, प्रांतीय कार्य समिति सदस्य डॉ. गोविंद सौलंकी, उज्जैन संभाग के अध्यक्ष मनोज जैन, छतरपुर संभाग के महासचिव प्रतीक खरे, उज्जैन जिलाध्यक्ष डॉ राहुल कटारिया एवं नागदा जिले के कोने कोने से आएं पत्रकार साथी उपस्थित थे। आयोजन समिति ने उपस्थित अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। आभार प्रदर्शन जिला महासचिव जितेंद्र चौहान ने किया।
