नारही पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने सरपंच, सहायक यंत्री और उपयंत्री की भूमिका पर उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 



नारही पंचायत में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने सरपंच, सहायक यंत्री और उपयंत्री की भूमिका पर उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग।

करैरा। जनपद पंचायत करैरा की ग्राम पंचायत नारही इन दिनों विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। ग्रामीणों ने पंचायत में कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरपंच, संबंधित तकनीकी अमले तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में सीसी सड़क, नाली निर्माण, पुलिया, स्टॉप डैम तथा अन्य विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये की राशि स्वीकृत हुई, लेकिन कई कार्यों की वास्तविक स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज प्रगति में भारी अंतर दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर निर्माण कार्य या तो अधूरे हैं अथवा उनकी गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत में हुए प्रत्येक निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि सीसी सड़क, नालियों, स्टॉप डैम, पुलिया निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों का स्वतंत्र विशेषज्ञों से भौतिक सत्यापन कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासन की राशि का उपयोग नियमानुसार हुआ है या नहीं।

कुछ ग्रामीणों ने मजदूरी भुगतान और मस्टर रोल को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पंचायत में मजदूरी कार्यों के संबंध में भी कई प्रकार की अनियमितताओं की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मस्टर रोल, भुगतान रजिस्टर, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर और बैंक भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायतें देकर मामले से अवगत कराया, लेकिन अब तक किसी व्यापक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है तो जांच कराने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जिला पंचायत और संबंधित विभागों से मांग की है कि पंचायत में हुए सभी निर्माण कार्यों, तकनीकी स्वीकृतियों, भुगतान प्रक्रियाओं और मजदूरी रिकॉर्ड की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए जिन्होंने कार्यों का सत्यापन कर भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए बड़ी राशि उपलब्ध करा रही है और यदि उस राशि के उपयोग को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं तो प्रशासन को गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संदिग्ध भुगतानों और प्रस्तावित कार्यों की विशेष समीक्षा की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, गुणवत्ता में कमी, फर्जी भुगतान, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या सरकारी धन के दुरुपयोग के तथ्य सामने आते हैं तो दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

अब पूरे मामले में लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष और बारीकी से की गई जांच ही यह तय करेगी कि पंचायत में विकास कार्य नियमानुसार हुए हैं या फिर जनता द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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