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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
दिनारा में पेड़ों का कत्लेआम! गौसेवक का फूटा गुस्सा—“अब नहीं रुकेगा अत्याचार, तुरंत हो ताबड़तोड़ कार्रवाई।दिनारा (शिवपुरी)। राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे लगे हरे-भरे पेड़ों पर चल रही बेरहमी ने अब जनआक्रोश का रूप ले लिया है। भीषण गर्मी के बीच जहां ये पेड़ राहगीरों, गोवंश और जीव-जंतुओं को राहत दे रहे थे, वहीं कुछ लोगों द्वारा मशीनों से इनकी कटाई ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। मामला अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।
गौसेवक कल्लू महाराज ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सीधे प्रशासन को चुनौती दी है। उनका कहना है कि “जो व्यक्ति हरे-भरे पेड़ों को कटवाने का ठेका दे रहा है, वह न सिर्फ प्रकृति का दुश्मन है बल्कि समाज के लिए भी खतरा है। जब कोई इंसान पेड़ों और जीव-जंतुओं के प्रति दया नहीं रखता, तो वह किसी का हितैषी नहीं हो सकता।”
उन्होंने खास तौर पर इस बात पर नाराजगी जताई कि जिस व्यक्ति पर पेड़ कटवाने का आरोप है, वह एक शिक्षक है। “शिक्षा देने वाला ही अगर प्रकृति विनाश का रास्ता अपनाए, तो आने वाली पीढ़ी क्या सीखेगी?”—यह सवाल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
कल्लू महाराज ने बताया कि दिनारा स्थित अशोक होटल के पास और उनकी निजी गौशाला के आसपास लगे नीम और अन्य छायादार पेड़ न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि सैकड़ों गौवंश, पक्षी और राहगीरों के लिए जीवनदायिनी छाया भी प्रदान करते हैं। “इन पेड़ों के नीचे ही जीव-जंतु अपनी तपती दोपहर काटते हैं, यही उनका आश्रय है,” उन्होंने कहा।
मामले को गंभीर बताते हुए उन्होंने शिवपुरी कलेक्टर, करेरा एसडीएम और तहसीलदार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका साफ कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे लगे पेड़ों की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी कीमत पर इनकी कटाई नहीं होने दी जानी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर आज पेड़ नहीं बचाए गए, तो कल ऑक्सीजन और बारिश दोनों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा। इसका जिम्मेदार कौन होगा?”
गौसेवक ने यह भी ऐलान किया कि यदि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। “पेड़ हैं तो जीवन है, पेड़ नहीं तो विनाश निश्चित है। जरूरत पड़ी तो इनके लिए बलिदान भी देंगे, लेकिन इन्हें कटने नहीं देंगे,” उन्होंने दो टूक कहा।
उन्होंने लोगों से भी अपील की कि “पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ” केवल नारा न रहे, बल्कि इसे जनआंदोलन बनाया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजने की मांग भी की।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तेजी से एक्शन लेता है, या फिर हरे-भरे पेड़ों की आड़ में चल रहा यह “हरा कत्लेआम” यूं ही जारी रहेगा।
