Jitendra jain jila shivpuri समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने जब UGC 2026 नियमों पर साफ़ तौर पर रोक लगा दी,तो सरकार को संदेश स्पष्ट था मनमानी नहीं चलेगी।
लेकिन मोदी जी की सरकार और बीजेपी–RSS की कार्यशैली तो सब जानते हैं।
जो ठान लिया, उसे किसी न किसी रास्ते से लागू करके ही दम लेते हैं।अब देखिए—
मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों में UGC 2023 के नियम लागू करने का फरमान जारी कर दिया गया,
जबकि ये नियम भावना और संरचना में UGC 2026 जैसे ही हैं।
इन नियमों के तहत
SC, ST, OBC, Women, PwD और अल्पसंख्यक वर्गों को तो संरक्षण दिया गया—
लेकिन General Category (खासकर सामान्य हिंदू छात्रों) को पूरी तरह बाहर रखा गया।
मतलब साफ़ है—
सुप्रीम कोर्ट ने 2026 पर रोक लगाई,
तो सरकार बोली:
“ठीक है, 2026 को नहीं छुएँगे…
लेकिन 2023 तो अभी खुला है, उसी को लागू कर देंगे।”
वाह! क्या ग़ज़ब का संविधान–सम्मान है!
यही नहीं—
ऐसा ही नियम तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर (बिहार) में भी लागू कर दिया गया,
जहाँ भी बीजेपी की ही सरकार है।
ऊपर से मीठी बातें,
अंदरखाने वही भेदभावपूर्ण UGC व्यवस्था लागू—
और आम छात्र को पता भी नहीं चलने दिया गया।
अब साफ़ है—
सरकार को जनआक्रोश से नहीं,
सिर्फ़ अपनी ज़िद और एजेंडे से मतलब है।
