Jitendra jain jila shivpuri समाचार
जल संसाधन विभाग द्वारा बदरवास जनपद की ग्राम पंचायत बरौदिया में एक तालाब का निर्माण किया जा रहा है।
इस तालाब के लिए ग्राम बरौदिया, मगरौरा और बरौदिया के लगभग एक सैंकड़ा किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।
तालाब के लिए वर्ष 2019 में सर्वे किया गया था,
तालाब का निर्माण कार्य पाइप लाइन में था और कागजी दस्तावेजों में कार्रवाई चलती रही।
बिजरौनी के किसानों को जब वर्ष 2019 में भूमि अधिग्रहण के लिए नोटिस जारी किए थे तो गाइड लाइन के हिसाब से 6.50 लाख रुपये प्रतिबीघा जमीन के हिसाब से अधिग्रहण राशि बताई गई थी।
लिखित में नोटिस भी किसानों को दिए गए थे।
अब सात साल बाद जब भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है
किसानों को मुआवजा राशि करीब 3 लाख 88 हजार रुपये प्रति बीघा के मान से दिया जा रहा है।
किसानों में आक्रोश की स्थिती बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि वह इस कीमत पर प्रशासन को अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं।
सात साल बाद भूमि अधिग्रहण के समय उनकी जमीन की कीमत पूर्व के मुकाबले लगभग दोगुनी दी जानी
प्रशासन द्वारा उन्हें पहले के मुकाबले लगभग आधी राशि प्रदान की जा रही है।
जब जल संसाधन के ईई को जानकारी के लिए फोन किया गया तो उन्होंने फोन ही अटेंड नहीं किया।
किसानों ने कलेक्टर को भी मामले की शिकायत दर्ज करवाई है।
क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी दर्ज करवा चुके हैं
उन्होंने हमें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
अब भी उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला तो वह फिर से उनके पास जाएंगे। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
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फसल कटते ही शुरू हो जाएगा तालाब का निर्माण
इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में अधिग्रहित जमीन पर किसानों की फसल उग रही है। जैसे ही किसानों की फसल कट जाएगी किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा देकर वहां तालाब का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। इस तालाब के बनने से आसपास के कई गांवों के किसानों को लाभ होगा, क्योंकि तालाब से जमीन का भू-जल स्तर बढ़ जाएगा। इसके अलावा मछली पालन के अलावा अन्य रोजगार के साधन भी किसानों को मिलेंगे।
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फैक्ट फाइल
-बरौदिया पंचायत में यह तालाब करीब 605 बीघा जमीन पर बनाया जाएगा।
-तालाब के लिए करीब 100 किसानों की जमीन का किया जा रहा है अधिगृहण।
-यह तालाब के लिए 28.50 करोड़ की लागत से बनवाया जाएगा।
-तालाब से आसपास के करीब 10-12 गांव होंगे लाभांवित।
-तीनों गांवों में अलग-अलग मान से किया जा रहा भूमि अधिगृहण।
-शासकीय गाइड लाइन द्वारा निर्धारित कीमत से दोगुना दिया जा रहा मुआवजा।
-जमीन पर कुआं, घर अथवा पेड़ होने पर उनका मुआवजा प्रथक दिया जाएगा।
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नगर पंचायत से ग्राम पंचायत होने के कारण आया मुआवजा राशि में अंतर
इस पूरे मामले में जब ग्रामीणों के बीच पहुंचे बदरवास तहसीलदार प्रदीप भार्गव से बात की गई तो उनका कहना था कि, पंचायत अधिनियम लागू होने से पहले बिजरौनी कभी नगर पंचायत रही थी। जब वर्ष 2019 में सर्वे हुआ था तब यह गांव शासकीय दस्तावेजों में नगर पंचायत के नाम पर दर्ज था। ऐसे में उस समय शासकीय गाइड लाइन से मुआवजा राशि का जो मूल्यांकन किया वह नगर पंचायत के मान से किया गया। हालांकि बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उसे शासकीय दस्तावेजों में ग्राम पंचायत दर्ज करवाया, क्योंकि वहां जमीन का रजिस्ट्री खर्च आदि अधिक लगता था। अब, जब भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है तो गाइड लाइन में जो रेट है वह ग्राम पंचायत के हिसाब से है। यही कारण है कि किसानों को लग रहा है कि, शासन ने उनकी मुआवजा राशि बढ़ाने की बजाय घटा दी है।

