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सुप्रीम कोर्ट का पूर्व सैनिक को झटका, धूम्रपान से स्ट्रोक पर पेंशन नहीं Court Denies Disability Pension
नई दिल्ली।
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व सैनिक को डिसेबिलिटी पेंशन देने से इनकार कर दिया है, जिससे एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस छिड़ गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सैनिक को हुआ ब्रेन स्ट्रोक सैन्य सेवा के कारण नहीं था, बल्कि उसकी धूम्रपान की आदत, दिन में लगभग दस बीड़ी पीने की लत के कारण हुआ था।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा, जिसने पहले सैनिक के पेंशन दावे को खारिज कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने आर्मी के पेंशन नियमों और मेडिकल ऑफिसर्स के लिए जारी गाइडलाइन्स का सही मूल्यांकन किया है।
इन नियमों के अनुसार, शराब, तंबाकू या ड्रग्स के अत्यधिक सेवन से होने वाली विकलांगता या मृत्यु के लिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि ऐसे मामले व्यक्ति के नियंत्रण में होते हैं।
इस फैसले से राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया है कि सैनिकों की सेहत और उनकी आदतों का उनके पेंशन दावों पर सीधा असर पड़ सकता है।
भारत में, यह मामला स्वास्थ्य और सैन्य सेवा के बीच संबंधों पर एक नई बहस को जन्म दे सकता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि यह देश के अन्य सैनिकों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है।
सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाएगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि सैन्य सेवा के दौरान हुई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए पेंशन का निर्धारण करते समय व्यक्तिगत आदतों का भी ध्यान रखा जाएगा।
यह निर्णय भारत के सैन्य पेंशन नियमों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिक की डिसेबिलिटी पेंशन याचिका खारिज की।
- धूम्रपान की आदत को स्ट्रोक का कारण माना, सैन्य सेवा को नहीं।
- आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया।
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Posted on 19 February 2026 | Follow चाचा का धमाका.com for the latest updates.