धनुर्धर सिद्धार्थ !!
सिद्धार्थ 16 के हुए!
पिता शुद्धोधन ने आस पास के राजाओं से सिद्धार्थ को ब्याहने हेतु पुत्री की माँग की!
लेकिन कोई राजा -रजवाड़ा अपनी पुत्री से सिद्धार्थ के विवाह के लिए तैयार न हुआ ।
लोगों ने ताने मारे विवाह के लिए बहुत सुंदर होना ही काफ़ी नहीं होता ।
धनुर्धर विद्या भी राजकुमार को आना चाहिए अन्यथा राज्य कैसे करेगा??
3 पिता शुद्धोधन ने सिद्धार्थ को समझाया धनुष की प्रत्यंचा हज़ार लोगों पर भारी पडती है ।
सिद्धार्थ ने बैठे बैठे कहा धनुष लाओ!!
धनुष लाया गया ।
सिद्धार्थ ने धनुष की प्रत्यंचा को अपने अंगूठे से चारों और घुमाया ।
शांत हुए ।
धनुष को बायें हाथ से पकड़ा और दायें हाथ से तीर को प्रत्यंचा पर चड़ाकर खींचा ।
इतनी ताकत से तीर चलाया की सनसनाते तीर की आवाज इतनी अधिक थी कि लोगो को लगा कि बादलों की गर्जना हो रही है !
दर्शक दंग रह गए!
शांत सा दिखने वाला राजकुमार धनुर्विद्या में इतना निपुण?
सिद्धार्थ ने तेज आवाज में कहा बताओ और क्या करना है ?
आवाज आई आठ इंच धातु की प्लेट को तीर से भेदना है!!
उपयुक्त स्थान पर आठ इंच धातु का टुकड़ा लगाया गया ।
सिद्धार्थ खड़े हुए और एक बार में ही तीर से धातु के टुकड़े को भेद दिया ।
सिद्धार्थ फिर बोले और कुछ?
आवाज आई अब चार इंच मोटे तने को भेदना होगा!
सिद्धार्थ ने प्रत्यंचा चढ़ाई और तने को तीर से भेद दिया ।
अभी असल परीक्षा बाकी थी ।
एक बेल गाड़ी में नदी की रेत भरी गई और उसमें एक धान की सूखा डंठल गाड़ा गया । डंठल को भेदने कहा गया
(जैसा मस्तानी फ़िल्म में फ़िल्माया गया है )
सिद्धार्थ ने धनुष से रेत में दबे डंठल को तीर से काट दिया ।
अब अंतिम और सबसे कठिन परीक्षा का समय आया
निर्णायक मंडल की आवाज़ आई कि अब घोड़े के एक बाल को तीर से भेदना होगा !!
मतंग के सूखे फल से घोड़े का बाल बांधकर एक योजन दूर लटकाया गया ।
सिद्धार्थ ने तीर चलाया और जिस घोड़े के बाल से फल लटकाया गया उस बाल को तीर से ध्वस्त कर दिया!
सिद्धार्थ की धनुर्विद्या देख सभी राजा -महाराजा दंग रहे गए ।
चालीस हज़ार नृत्य और गाती सहेलियों से घिरी सबसे पीछे चलती हुई यशोधरा उपास्थित हुई और सिद्धार्थ से विवाह संपन्न हुआ

