तीर्थोदय गोलाकोट जी अब केवल जिनालयों और दर्शन की परंपरा तक सीमित रहने वाला क्षेत्र नहीं रहेगा

 


Jitendra jain jila shivpuri 

 समाचार 

तीर्थोदय गोलाकोट जी अब केवल जिनालयों और दर्शन की परंपरा तक सीमित रहने वाला क्षेत्र नहीं रहेगा 

यह जगत पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की करुणा, दूरदृष्टि और लोककल्याणकारी संकल्पों का जीवंत प्रतीक बनेगा। 

उनकी वाणी में जो भविष्य झलकता है, वह केवल कल्पना नहीं, बल्कि एक सशक्त, सेवा-प्रधान और संस्कार-समृद्ध समाज की रचना का स्वप्न है।

जगत पूज्य जब यह कहते हैं कि यहाँ ऐसा विशाल अस्पताल बने कि कोई भी रोगी अधूरा इलाज लेकर वापस न जाए, तब वे किसी सामान्य चिकित्सा केंद्र की बात नहीं करते, वे ऐसे सम्पूर्ण उपचार केंद्र की परिकल्पना करते हैं जहाँ हर प्रकार के रोग का उपचार, हर वर्ग के व्यक्ति के लिए, बिना भेदभाव के उपलब्ध हो। जहाँ आधुनिक चिकित्सा की सुविधाएँ हों, विशेषज्ञ चिकित्सक हों, करुणा से भरे सेवाभावी हाथ हों और पीड़ित मानवता को राहत देने का सतत प्रयास हो। यह अस्पताल केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं होगा, बल्कि मानव सेवा का मंदिर बनेगा।

और इस सेवा-यात्रा में केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि गुरुकुल, शिक्षा, संस्कार, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण की अनेक योजनाएँ भी इस क्षेत्र की पहचान बनेंगी। जहाँ बालक केवल अक्षर नहीं सीखेंगे, बल्कि जीवन जीने की कला, संयम, अनुशासन और करुणा का पाठ भी पढ़ेंगे। जहाँ युवा सेवा को संकल्प समझेंगे और समाज के प्रति अपने कर्तव्य को सौभाग्य।

ऐसे पावन संकल्पों को साकार करने के लिए जब समाज के श्रेष्ठजन आगे आते हैं, तब इतिहास रचा जाता है। जैन गौरव श्री सत्येंद्र जी जैन राजधानी बेसन वालों का त्याग, श्री अशोक जी पाटनी (आर. के. मार्बल) का उदार सहयोग और श्री पीयूष जी पायल वालों का द्रव्य दान केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की जीवंत मिसाल है। इन महानुभावों का यह दान आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाएगा कि संपत्ति का सर्वोच्च उपयोग सेवा और निर्माण में होता है, न कि केवल संग्रह में।

इन दानवीरों का नाम केवल शिलापट्टों पर नहीं, बल्कि हजारों रोगियों की दुआओं, विद्यार्थियों की प्रगति और असहाय जनों की मुस्कान में अंकित होगा। संसार तब उन्हें केवल उद्योगपति या दानदाता नहीं, बल्कि लोककल्याण के शिल्पकार के रूप में स्मरण करेगा।

जगत पूज्य की कृपा से, उनके मार्गदर्शन में, तीर्थोदय गोलाकोट जी अब साधना के साथ-साथ सेवा, शिक्षा और संवेदना का महातीर्थ बनेगा। जहाँ तीर्थंकरों की वाणी आत्मा को ऊँचा उठाएगी और गुरुकुल व अस्पताल मानव जीवन को सुरक्षित और सशक्त बनाएंगे। जहाँ भक्ति और सेवा एक-दूसरे की पूरक बनकर समाज के हर वर्ग तक पहुँचेगी।

अब यह क्षेत्र केवल दर्शन का नहीं, निर्माण का केंद्र बनेगा। केवल मोक्ष पथ का संकेत नहीं देगा, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की दिशा भी दिखाएगा। और यह सब संभव हो रहा है जगत पूज्य की करुण दृष्टि, उनके संकल्प और समाज के सज्जनों के समर्पण से।

निश्चय ही आने वाला समय यह साक्षी बनेगा कि तीर्थोदय गोलाकोट जी केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि जन-जन के कल्याण का महामंच बनकर उभरेगा — जहाँ श्रद्धा को सेवा का स्वरूप मिलेगा और भक्ति मानवता के उत्थान में परिणत होगी।

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