इनकमिंग कॉल बंद करना कहां का न्याय है?

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Jitendra jain jila shivpuri 

 समाचार 

SIM मेरा, मोबाइल मेरा  फिर इनकमिंग कॉल पर ताला क्यों? 

यह सवाल राघव चड्ढा ने उठाकर करोड़ों आम लोगों की आवाज़ को सामने रखा है।

उनका कहना बिल्कुल तार्किक लगता है अगर बैलेंस खत्म होने पर आउटगोइंग कॉल बंद होती है तो वह समझ में आता है, क्योंकि उसमें खर्च होता है। 

लेकिन इनकमिंग कॉल बंद करना कहां का न्याय है? 

 SIM कार्ड उपभोक्ता का है,

 मोबाइल फोन उपभोक्ता का है,

 फिर सिर्फ कॉल रिसीव करने के लिए रिचार्ज की मजबूरी क्यों?

 गरीब और सीमित आय वाले लोगों के लिए यह सबसे बड़ा बोझ है, जो फोन सिर्फ ज़रूरी कॉल के लिए रखते हैं। इनकमिंग बंद होने पर उन्हें मजबूरन रिचार्ज कराना पड़ता है, जो कई बार जबरन वसूली जैसा महसूस होता है।

टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क खर्च और मेंटेनेंस का तर्क देती हैं, लेकिन सवाल यह है 

क्या इसका पूरा बोझ आम जनता पर डालना सही है?

निष्कर्ष:

राघव चड्ढा की बात सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की मांग है।

इनकमिंग कॉल पर रोक लगाना आम आदमी के साथ नाइंसाफी जैसा लगता है।

अब जरूरत है कि इस नियम पर फिर से गंभीरता से विचार किया जाए।

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