ठेकेदार अज्जू गुप्ता को 6 माह की जेल, 20 लाख का चेक बाउंस करने पर करीब 28 लाख चुकाने होंगे



 Jitendra jain jila shivpuri समाचार 

ठेकेदार अज्जू गुप्ता को 6 माह की जेल, 20 लाख का चेक बाउंस करने पर करीब 28 लाख चुकाने होंगे

शिवपुरी। जिले की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रीति परिहार की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में चेक बाउंस के मामले में शासकीय ठेकेदार अजय कुमार गुप्ता उर्फ अज्जू को दोषी करार दिया है। 

कोर्ट ने अज्जू गुप्ता को 6 माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है 

और फरियादी को ब्याज सहित लगभग 27.98 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

क्या था मामला?

यह मामला कमलागंज, शिवपुरी निवासी और शासकीय सेवा में कार्यरत मुकेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा दायर किया गया था।

 मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि फिजीकल रोड निवासी ठेकेदार अजय कुमार गुप्ता उर्फ अज्जू को उन्होंने उधार राशि दी थी। 

इसके एवज में अज्जू गुप्ता ने 11 जनवरी 2022 को 20,00,000 रुपये (बीस लाख) का चेक जारी किया था। 

जब मुकेश कुमार ने यह चेक बैंक में जमा किया, तो अपर्याप्त राशि के कारण यह बाउंस हो गया। 

नोटिस दिए जाने के बावजूद अज्जू गुप्ता ने भुगतान नहीं किया, जिसके बाद मुकेश श्रीवास्तव ने कानूनी सहारा लिया।

कोर्ट का सख्त फैसला: सजा और भारी जुर्माना

न्यायालय प्रीति परिहार ने प्रकरण की सुनवाई के बाद आरोपी अजय कुमार गुप्ता को परकाम्य लिखत 

अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत दोषी पाया। 

अपने आदेश में न्यायालय ने कहा अभियुक्त अज्जू गुप्ता को 6 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।

 कोर्ट ने अजय गुप्ता को निर्देश दिया है कि वह परिवादी

 मुकेश कुमार श्रीवास्तव को मूल चेक राशि (20 लाख रुपये) पर 11 जनवरी 2022 से निर्णय दिनांक तक 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज, स्टाम्प खर्च और अन्य खर्च सहित कुल 27,98,876 रुपये (सत्ताईस लाख अटठानवे हजार आठ सौ छिहत्तर रुपये) का भुगतान करे। यदि अज्जू गुप्ता प्रतिकर की राशि का भुगतान करने में विफल रहते हैं, 

तो उन्हें एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा

नए कानून 'BNSS' का प्रभाव

न्यायालय ने अपने फैसले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 395 (3) और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण न्याय दृष्टांतों का भी उल्लेख किया। यह दर्शाता है कि अब वित्तीय अपराधों, विशेषकर चेक बाउंस जैसे मामलों में, न्यायालय आर्थिक दंड के साथ-साथ कठोर कारावास का भी प्रावधान कर रहे हैं, जिससे ऐसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।

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