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अरावली में अवैध खनन: सुप्रीम कोर्ट की चिंता, क्या नेता करेंगे कार्रवाई? Aravalli Mining Concerns Supreme Court
दिल्ली।
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जो इस पर्वतमाला को खोखला करने में एक प्रमुख भूमिका निभा रही है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की बेंच ने 21 जनवरी को अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और अवैध खनन पर रोक लगाने पर जोर दिया।
न्यायालय ने अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने और एक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, अरावली पर्वतमाला को परिभाषित करने के मुद्दे पर भी अलग से विचार करने की आवश्यकता बताई है।
अरावली पर्वतमाला की 100 मीटर की सीमा के आदेश को यथावत रखते हुए, न्यायालय ने विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने के लिए नाम और सुझाव मांगे हैं।
इस मामले पर दोबारा सुनवाई तक कार्ययोजना और विशेषज्ञों के नाम व सुझाव देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
यह मामला **राजनीति** से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि अवैध खनन पर रोक लगाने में स्थानीय **नेता** और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है।
आगामी **चुनाव** को देखते हुए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या **कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी पार्टियां इस मुद्दे को गंभीरता से लेती हैं और इस पर कार्रवाई करती हैं।
अरावली पर्वतमाला का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन पर जताई चिंता।
- अवैध खनन रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश।
- विशेषज्ञों की कमेटी बनाने के लिए मांगे गए नाम और सुझाव।
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Posted on 29 January 2026 | Check चाचा का धमाका.com for more coverage.