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महर्षि महाविद्यालय पर छात्रवृत्ति और प्रैक्टिकल को लेकर गंभीर सवाल, DIET प्राचार्य के बयान से बढ़ा विवाद।
शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय को लेकर छात्रवृत्ति, प्रैक्टिकल और इंटर्नशिप की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी मामले में DIET के प्राचार्य एम.के. शरीफ से चर्चा किए जाने का दावा सामने आया है। उनके अनुसार, वर्ष 2024-25 और 2025-26 की महर्षि महाविद्यालय की छात्रवृत्ति उनके द्वारा नहीं की गई और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं है।
बताया जा रहा है कि महर्षि महाविद्यालय के लिए जिला स्तर पर DIET की नोडल भूमिका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नोडल स्तर पर छात्रवृत्ति की जानकारी और प्रक्रिया से संबंधित कोई भूमिका नहीं रही, तो छात्रवृत्ति किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत या वितरित हुई?
प्रैक्टिकल को लेकर भी उठे सवाल
वर्ष 2025-26 के D.El.Ed प्रैक्टिकल को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि महाविद्यालय के विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल नोडल व्यवस्था के अंतर्गत होने थे, तो—
विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल कहां कराए गए?
किस संस्था या केंद्र पर प्रैक्टिकल हुए?
विद्यार्थियों की उपस्थिति किसने दर्ज की?
प्रैक्टिकल के अंक किस शिक्षक/परीक्षक ने दिए?
नोडल अधिकारी के रिकॉर्ड में इन प्रैक्टिकल का क्या विवरण दर्ज है?
यदि विद्यार्थियों ने नोडल संस्था के समक्ष प्रैक्टिकल प्रस्तुत नहीं किए, तो अंक किस आधार पर दर्ज किए गए?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
इंटर्नशिप पर भी जांच की जरूरत
महर्षि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है। इंटर्नशिप के लिए विद्यार्थियों को किन स्कूलों में भेजा गया, उनकी उपस्थिति किसने सत्यापित की, स्कूलों के प्रधानाध्यापकों द्वारा प्रमाणित रिकॉर्ड कहां है और विद्यार्थियों की इंटर्नशिप रिपोर्ट किस अधिकारी ने जांची—इन सभी दस्तावेजों की जांच होना आवश्यक है।
‘करोड़ों के घोटाले’ के आरोपों की हो निष्पक्ष जांच
छात्रवृत्ति, प्रैक्टिकल और इंटर्नशिप—तीनों मामलों में यदि रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयानों में अंतर पाया जाता है, तो मामला गंभीर हो सकता है। हालांकि करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप अभी जांच से प्रमाणित होना बाकी है।
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग से मांग है कि 2024-25, 2025-26 और 2026 से संबंधित छात्रवृत्ति रिकॉर्ड, प्रैक्टिकल अंकपत्र, उपस्थिति रजिस्टर, परीक्षक विवरण और इंटर्नशिप रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराई जाए। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब नोडल स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी छात्रवृत्ति और प्रक्रिया की जानकारी से इनकार कर रहे हैं, तो विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति, प्रैक्टिकल और इंटर्नशिप का रिकॉर्ड आखिर किसके पास है?
