न्यूज़ चाचा का धमाका
जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
सत्य उजागर होना ही चाहिए।
एक सत्य उजागर करते हैं और एक का सत्य उजागर होता है।
जो सत्य उजागर करने में लगे हैं, वही असत्यवादी हैं।
कभी-कभी चोर क्या करता है? चोरी करके चिल्लाता है—चोर, चोर, चोर, चोर, चोर। जिससे लोग समझते हैं कि यह तो चोर है ही नहीं। ऐसे ही कई लोग अपराध करके चिल्लाते हैं—अपराधी को पकड़ो, सत्य का पता लगाओ। पता चलता है कि उस सत्य की नींव के नीचे वही थे।
जो सबसे ज्यादा रोते हैं ना, बताते हैं एक Murder हुआ था, कहीं बहुत साल पहले की घटना है। उस व्यक्ति ने किया जिसका कोई पता ही नहीं था, कोई कर ही नहीं सकता। उसी ने उसकी अर्थी बांधी। सबसे ज्यादा उसके कार्यों में शामिल हुआ। घरवालों ने पकड़ा कि ये हो ही नहीं सकता, अंत में वही निकला।
तो ये सत्य-सत्य को उजागर करने की बात करते हैं ना, अंत में जाकर के यही उसमें फंसते हैं कि सत्य नहीं है, इस असत्य की आड़ में... सत्य की आड़ में असत्य को सींच रहे हैं।
तो दो प्रकार का, जो सत्य को उजागर करने में लगे रहते हैं, यही सत्य के सबसे बड़े आवरणकर्ता हैं। अंत में जब इसकी खोज का अंत आता है, तो पता यही पड़ जाता है कि जो सत्य-सत्य चिल्ला रहे थे, वही इस अपराध की जड़ हैं।
इसलिए सेठ सुदर्शन, सामनीति कहती है, सत्य को उजागर मत करो, सत्य उजागर हो जाएगा। और सत्य उजागर होना ही चाहिए।
असत्य बहुत बोलता है, असत्य बड़बड़ाता है, असत्य सत्य की डींगें मारता है। लेकिन सत्य जो है, मौन रहता है। इतना मौन रहता है, इतना मौन रहता है, इतना मौन रहता है, कि फांसी तक पहुंच जाता है और जब फांसी लगती है, तो सत्य उजागर हो जाता है, सिंहासन बन जाता है सूली का।
सत्य तो उजागर हो के रहेगा, होना ही चाहिए। सत्य को ढांकने की जरूरत ही नहीं है। सत्य उजागर एक दिन होगा ही होगा। और सत्य को उजागर करना नहीं, बिल्कुल भी नहीं ढांकना। सत्य को क्यों ढांकना चाहते हैं? सत्य को उजागर होने दो।
क्योंकि सत्य कभी किसी से डरता नहीं है। और सत्य उजागर हो जाएगा, बस सामता परिणामी आकुलता नहीं करता। वो इंतजार करता है। उसको विश्वास होता है कि सत्य को उजागर करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सत्य को आज तक कोई ढांक नहीं पाया।
सत्य एक दिन उजागर हो के रहेगा, यह ध्रुव सत्य है। इसलिए नीति यही है, सामभाव यही कहता है—थोड़ा इंतजार करो।
थोड़ा इंतजार करो, सत्य उजागर होगा और सारा जगत देखेगा। जो सत्य की चर्चा कर रहे थे, उन्हीं का मुंह काला होगा और जो मौन बैठे थे, सत्य की विजय होगी, सूली सिंहासन बनेगी।
क्योंकि मकड़ी कितना भी षड्यंत्र रचे, जब उस जाल में फंस करके तड़फड़ाएगी, तब सारा जगत देखेगा कि ये जाल बुनने वाली मकड़ी स्वयं ही इस जाल की निमित्त बनाने वाली है। इससे नहीं, इसलिए सामभाव, सत्य का इंतजार करो।
सत्य कभी पराजित नहीं होता। सत्य कभी हमेशा जीतता आया है, जीतेगा। थोड़ा देर होती है। सत्यवादी के लिए थोड़ा देर करते हैं। सेठ सुदर्शन को सब कुछ हुआ, लेकिन सत्य कभी हारा नहीं।
जितने-जितने सत्यवादी हुए, सब मौन रहे। सेठ सुदर्शन से पूछा गया, "आपको कुछ बोलना है?" वे कुछ नहीं बोले। कुछ नहीं बोले, शांत रहे। सत्य तो उजागर हो गया।
जितनी सतियां हुई हैं, वे कभी कुछ नहीं बोलीं। अंत में कुदरत ने उस सत्य को उजागर किया, असत्य को पराजित होना पड़ा, सत्य की विजय हुई। यह विश्वास ही हमें समता भाव धारण कराता है। और समता रखना चाहिए, सांच को कभी आंच नहीं आती है।
लगता है कि बदनामी हो रही है। जितनी बदनामी हो रही है, एक दिन जब सत्य उजागर होगा, वो सारी बदनामी यश और ख्याति में बदल जाएगी। और ऐसा अमिट ख्याति मिलेगी, वैसे कितना भी ख्याति करता, तो भी वो ख्याति नहीं पा सकते थे।
आज सेठ सुदर्शन यदि सफाई देकर के बच के आ जाते, तो आज पुराणों में उनकी कथा नहीं होती। लेकिन उन्होंने समता भाव धारण किया, मौन रहे, अंत में सत्य की विजय हुई। मोक्ष जाने के बाद भी आज की उनकी कथाएं शास्त्रों में लिखी हैं।
इसलिए समता भाव सत्य के ऊपर विश्वास दिलाता है और जिसको सत्य पर विश्वास है, वो सदा समता भाव का रूप धारण करता है और समता में वो चमत्कार होता है, जो बड़ी-बड़ी साधना और शक्तियों में नहीं होता, जो चमत्कार समता में होता है। 🙏नमोस्तु गुरूवर मुनिपुंगव
श्री सुधासागर जी महाराज !!!
चरण सेवक
जितेंद्र जैन न्यूज चाचा का धमाका
प्रधान संपादक
जिला शिवपुरी मोबाइल नंबर 9993856076
