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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
महर्षि महाविद्यालय पर उठ रहे गंभीर सवाल, प्रशासन की चुप्पी पर भी प्रश्नचिह्न।
शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय को लेकर लगातार कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
कॉलेज की वास्तविक भवन एवं भौगोलिक स्थिति, विद्यार्थियों की इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल के लिए निरीक्षण करने वाले अधिकारियों एवं नोडल अधिकारियों,
वर्ष 2026 में हुई नई मान्यता के निरीक्षण तथा गरीब छात्राओं की स्कॉलरशिप को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि महर्षि महाविद्यालय का संचालन नियमित रूप से हो रहा है,
तो उसकी वास्तविक बिल्डिंग कहां है और वहां विद्यार्थियों की पढ़ाई एवं शैक्षणिक गतिविधियां किस प्रकार संचालित हो रही हैं?
वहीं विद्यार्थियों की इंटर्नशिप और
प्रैक्टिकल को लेकर भी अभिभावकों और छात्रों के बीच सवाल उठ रहे हैं।
2026 में मान्यता के निरीक्षण पर भी सवाल
वर्ष 2026 में महाविद्यालय को नवीन मान्यता दिए जाने से पहले जिन अधिकारियों और नोडल अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया,
उनके निरीक्षण की रिपोर्ट, निरीक्षण स्थल, जांच के बिंदु और निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मान्यता देने से पहले वास्तव में क्या-क्या देखा गया था।
गरीब छात्राओं की स्कॉलरशिप कहां गई?
महाविद्यालय में अध्ययनरत गरीब छात्राओं की छात्रवृत्ति को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
छात्राओं को कितनी स्कॉलरशिप स्वीकृत हुई, कितनी राशि उनके खातों में पहुंची और यदि किसी छात्रा को राशि नहीं मिली तो उसका कारण क्या है—
इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और महाविद्यालय प्रबंधन को देना चाहिए।
यह मामला केवल एक कॉलेज का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा सवाल है।
इसलिए प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर भवन, मान्यता निरीक्षण, इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल, अधिकारियों की भूमिका और छात्रवृत्ति से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।
सवाल सीधा है—अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो फिर जांच और दस्तावेज सार्वजनिक करने में परेशानी क्या है?
