महर्षि महाविद्यालय कागजों में या जमीन पर? मौके पर मेवाड़ रिसोट मिला, जिम्मेदारों की जांच पर उठे सवाल।

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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी 

समाचार 


महर्षि महाविद्यालय कागजों में या जमीन पर? मौके पर मेवाड़  रिसोट मिला, जिम्मेदारों की जांच पर उठे सवाल।

शिवपुरी। जिले में संचालित बताए जा रहे महर्षि महाविद्यालय को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। मौके पर पहुंचकर पड़ताल करने पर जिस स्थान पर महाविद्यालय संचालित होने की जानकारी सामने आई, वहां मेवाड़ रिजॉर्ट संचालित मिला। ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर महर्षि महाविद्यालय वास्तव में कहां संचालित हो रहा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई, कक्षाएं एवं प्रशिक्षण कहां कराया जा रहा है?

मामले को लेकर डायट प्राचार्य एम.के. खान से चर्चा की गई। उनके अनुसार, उनकी टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में महर्षि महाविद्यालय की मौके पर स्थिति स्पष्ट नहीं मिली। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई थी, जिसमें रोहिणी अवस्थी एवं डीसीसी अधिकारी शामिल थे। अब सवाल यह है कि इस जांच की रिपोर्ट क्या है और उस पर क्या कार्रवाई हुई?

इसके बाद जिले के पूर्व बीईओ विवेक श्रीवास्तव से भी मामले को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने अपनी जानकारी में इस मामले से अनभिज्ञता जताई। वहीं अपर कलेक्टर दिनेश चंद शुक्ला को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया। उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

मामला जब कलेक्टर अर्पित वर्मा के संज्ञान में पहुंचा तो उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर स्थिति देखने का आश्वासन दिया है। अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

सबसे बड़ा सवाल—अगर कॉलेज मौके पर नहीं है तो मान्यता कैसे?

यदि निरीक्षण में वास्तव में महाविद्यालय निर्धारित पते पर संचालित नहीं पाया गया, तो कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं—

कॉलेज की मान्यता किस आधार पर हुई?

निरीक्षण के समय अधिकारियों ने क्या देखा?

विद्यार्थियों की कक्षाएं कहां लगती हैं?

उपस्थिति और इंटर्नशिप का रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार हुआ?

और सबसे अहम—क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी धरातल पर जाकर संस्थान की वास्तविक स्थिति जांची?

इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आएगा।

प्रशासन से मांग—कागज नहीं, मौके की जांच हो

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए महर्षि महाविद्यालय के मान्यता दस्तावेज, निरीक्षण रिपोर्ट, भवन संबंधी रिकॉर्ड, विद्यार्थियों की उपस्थिति, फीस रिकॉर्ड, परीक्षा रिकॉर्ड और इंटर्नशिप दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित स्थान का पंचनामा और वीडियोग्राफी के साथ भौतिक सत्यापन कराया जाए।

यदि संस्था नियमों के मुताबिक संचालित मिलती है तो सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा। लेकिन यदि कागजों में कॉलेज और जमीन पर रिजॉर्ट मिलता है, तो यह केवल शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर गंभीर सवाल होगा।

अब शिवपुरी की जनता और विद्यार्थियों को कलेक्टर की जांच का इंतजार है—क्या महर्षि महाविद्यालय का सच सामने आएगा या फाइलों में ही दबा रहेगा?

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