न्यूज् चाचा का धमाका
जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
डीएलएड कॉलेजों की व्यवस्था पर उठे सवाल, इंटर्नशिप से लेकर छात्रवृत्ति तक जांच की मांग।
शिवपुरी। जिले में संचालित डीएलएड महाविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। खास तौर पर इंटर्नशिप, छात्रवृत्ति, कॉलेज की वास्तविक भौगोलिक स्थिति और संस्थानों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं की निष्पक्ष जांच की मांग सामने आ रही है।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के रिकॉर्ड में DIET शिवपुरी को डीएलएड संचालित करने वाली सरकारी संस्था के रूप में दर्ज किया गया है। वहीं मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट पर डीएलएड संस्थानों के लिए 2025-26 और 2026-27 सत्र की संबद्धता/नवीनीकरण संबंधी जानकारी उपलब्ध है। �
NCTE +1
महर्षि महाविद्यालय की बिल्डिंग को लेकर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल महर्षि महाविद्यालय को लेकर उठाया जा रहा है। विद्यार्थियों और स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जिस स्थान और भवन को कॉलेज के रूप में दर्शाया जाता है, उसकी वास्तविक स्थिति और संस्थान के रिकॉर्ड में दर्ज पते का मौके पर सत्यापन कराया जाना चाहिए।
क्या कॉलेज के पास डीएलएड संचालन के लिए निर्धारित भवन, कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और अन्य आवश्यक सुविधाएं वास्तव में उपलब्ध हैं?
इसका जवाब संबंधित विभाग द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
इंटर्नशिप बनी सबसे बड़ी पहेली
डीएलएड प्रशिक्षण में इंटर्नशिप विद्यार्थियों की व्यावहारिक शिक्षक-प्रशिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि महर्षि महाविद्यालय सहित जिले के विभिन्न डीएलएड कॉलेजों के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप वर्ष 2025 में किन-किन स्कूलों में कराई गई, कितने दिन कराई गई और उसकी उपस्थिति एवं मूल्यांकन का रिकॉर्ड क्या है।
यदि विद्यार्थियों की इंटर्नशिप केवल कागजों में पूरी दिखाई गई है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल होगा। इसलिए इंटर्नशिप स्कूलवार सूची, उपस्थिति रजिस्टर, निरीक्षण रिपोर्ट और मूल्यांकन रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
छात्रवृत्ति का भी हो भौतिक सत्यापन
इसी तरह विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी है। कितने विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया, कितने पात्र पाए गए, कितनी राशि स्वीकृत हुई और वास्तव में विद्यार्थियों के खातों में कितनी राशि पहुंची—इन सभी बिंदुओं की जांच की जरूरत है।
डीआईईटी की भूमिका पर भी नजर
डीएलएड संस्थानों की निगरानी और प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़े विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। सवाल यह है कि क्या संबंधित संस्थानों का नियमित निरीक्षण हुआ? अगर हुआ तो निरीक्षण में भवन, विद्यार्थियों की उपस्थिति, इंटर्नशिप और शैक्षणिक गतिविधियों की क्या स्थिति पाई गई?
मामला गंभीर है तो जांच भी दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए। प्रशासन को जिले के सभी डीएलएड कॉलेजों की मान्यता, भवन, विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति, इंटर्नशिप, छात्रवृत्ति और निरीक्षण रिपोर्ट की संयुक्त जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जब तक जांच पूरी न हो, भ्रष्टाचार को सिद्ध तथ्य नहीं बल्कि लगाए जा रहे आरोप और उठ रहे सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यही निष्पक्ष जांच की पहली शर्त है।
