जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
बाप के अंतिम संस्कार में बेटे नहीं आए,,
एक खबर है भोपाल की यहां अपना घर नामक वृद्धाश्रम में 80 वर्षीय इंदौर निवासी घनश्याम जी की मृत्यु हो गई ।इंदौर में निवासी उनके दोनों बेटे अपने बाप के अंतिम संस्कार में
भी नहीं आए ।
4 अगस्त को भोपाल में अंतिम सांस लेने वाले घनश्याम जी को उनके बेटे 4 वर्ष पूर्व यहां वृद्ध आश्रम में छोड़ गए थे,,उन्हें सूचना देने के बाद भी उन्होंने ये कहकर आने से साफ इनकार कर दिया कि इन्होंने हमारे लिए किया ही क्या है,,,? जबकि घनश्याम जी कारोबारी रहे है । इंदौर में टायर ट्यूब का बड़ा थोक का काम है,,जो अब दोनों बेटे संभाल रहे है,,।
यहां से समाज के लिए ये चिंता का विषय है,,?
देश में आज से बीस तीस वर्ष पूर्व वृद्धाश्रम की संख्या गिनी चुनी थी,,अब बहुत तेजी से संख्या भी बढ़ी और उसमें रहने वाले वृद्ध लोग की संख्या भी,,,
इसका अध्ययन तो समाज शास्त्री करेंगे,,ऐसा क्यों है,,,?
पर ,मै इसका कारण जो समझता हूं कि,बच्चों से पारिवारिक लगाव कम है,,
ये आधुनिक शिक्षा का परिणाम है,,?
बच्चों को उनके बचपन से दिनभर स्कूल और पढ़ाई कोचिंग,,में समय गुजारना,,।
फिर किशोर होते हुए उन्हें बाहर पढ़ने भेज देना,,वही से सीधे नौकरी में मेट्रो सिटी या विदेश,,,
तो बच्चे न तो त्यौहार पर घर आ रहे ,न परिवार के साथ समय बिता रहे,,
अब परिवार माता पिता उनके लिए प्राथमिकता नहीं रहे,,बॉस और कंपनी उनकी प्राथमिकता हो गए ,,,।
बच्चों के कॉलेज और पैकेज में सगर्व इतराने वाले ,अपने बच्चों को परिवार से जोड़े रखिए,,
वरना,,
भगवान न करे,,,ऐसे किसी परिणाम पर अंतिम प्रणाम हो,,,
(चित्र में अपना घर की संचालिका श्री मति माधुरी मिश्रा घनश्याम जी की देखभाल करते हुए,,)
