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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
महर्षि महाविद्यालय की मान्यता पर गंभीर सवाल: छात्राओं की परीक्षा, कक्षाएं और इंटर्नशिप आखिर हुई कहाँ?
शिवपुरी। महर्षि महाविद्यालय की मान्यता और उसके वास्तविक संचालन को लेकर अब कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में महर्षि महाविद्यालय, शिवपुरी का एक पुराना पता पोहड़ी रोड, सिंह निवास, शिवपुरी दर्ज मिलता है, जबकि वर्तमान स्थिति और वास्तविक संचालन की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मौके पर महाविद्यालय का वास्तविक संचालन नहीं पाया जाता है, तो छात्राओं की प्रयोगात्मक परीक्षाएं कब और कहाँ आयोजित हुईं? परीक्षा के लिए कौन-कौन से अधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए थे? निरीक्षण किसने किया और परीक्षा की उपस्थिति एवं मूल्यांकन रिकॉर्ड कहाँ हैं?
कक्षाएं लगीं तो कहाँ?
महाविद्यालय के भौतिक अस्तित्व और संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह भी जांच का विषय है कि विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं किस भवन में, किस पते पर और किस समय-सारणी के अनुसार संचालित हुईं। यदि कक्षाएं दूसरे स्थान पर लगीं, तो क्या उस स्थान की जानकारी संबंधित विभाग और मान्यता देने वाली संस्था को दी गई थी?
इंटर्नशिप का भी खुलेगा हिसाब
महाविद्यालय के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप किस स्कूल या संस्था में कराई गई?
इंटर्नशिप के लिए स्कूलों की सूची किसने स्वीकृत की?
विद्यार्थियों की उपस्थिति किसने प्रमाणित की?
निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?
इंटर्नशिप रिपोर्ट और मूल्यांकन रिकॉर्ड कहाँ हैं?
इन सवालों का जवाब दस्तावेजों से सामने आना चाहिए।
11 महाविद्यालयों की नवीन मान्यता में क्या देखा गया?
शिवपुरी जिले के जिन 11 महाविद्यालयों को नवीन मान्यता दिए जाने की बात सामने आ रही है, उनकी मान्यता प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। आखिर निरीक्षण दल ने मौके पर क्या-क्या देखा? भवन, कक्षाएं, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, स्टाफ, विद्यार्थियों की उपस्थिति, इंटर्नशिप व्यवस्था और अन्य अनिवार्य सुविधाओं का भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया?
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के वर्तमान D.El.Ed रिकॉर्ड में संस्थानों के पते, सीटें और मान्यता/नवीनीकरण संबंधी विवरण दर्ज किए जाते हैं, इसलिए प्रत्येक संस्था की मान्यता फाइल और निरीक्षण रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। �
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जांच हो तो सामने आएगा सच
यह मामला केवल एक महाविद्यालय का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है। इसलिए आरोपों को सही या गलत मानने से पहले प्रशासन को चाहिए कि वह—
मान्यता फाइल + निरीक्षण रिपोर्ट + नोडल आदेश + प्रयोगात्मक परीक्षा रिकॉर्ड + उपस्थिति पत्रक + इंटर्नशिप रिकॉर्ड + भवन/भूमि संबंधी दस्तावेज
सार्वजनिक कर निष्पक्ष जांच कराए।
सवाल सीधा है—यदि महाविद्यालय मौके पर संचालित नहीं था, तो मान्यता किस आधार पर हुई और विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा तथा इंटर्नशिप वास्तव में कहाँ हुई?
अब गेंद प्रशासन के पाले में है—जांच होगी या सवाल फाइलों में ही दबे रहेंगे?
