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जितेंद्र जैन जिला शिवपुरी
समाचार
राष्ट्रीय राजमार्ग पर ‘गलत नामों’ का खेल लोहे के बोर्ड बने जनता के लिए मुसीबत, तत्काल सुधार की मांग।
करैरा/दिनारा। राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगाए गए लोहे के साइन बोर्ड इन दिनों राहगीरों के लिए सुविधा नहीं बल्कि भारी परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं।
इन बोर्डों पर ग्रामों और स्थानों के नाम गलत लिखे जाने से बाहर से आने वाले लोग लगातार भ्रमित हो रहे हैं और गलत दिशा में भटक रहे हैं।
स्थानीय समाजसेवियों ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से तत्काल सुधार की मांग की है।
गौ सेवक कल्लू महाराज ने बताया कि झांसी से लेकर शिवपुरी, अशोकनगर, गुना और इंदौर तक से आने वाले लोग जब इन बोर्डों को पढ़ते हैं
तो उन्हें सही रास्ता नहीं मिल पाता। उदाहरण के तौर पर दिनारा क्षेत्र में “डबरा” की जगह “दवरा” लिखा गया है,
जिससे यात्रियों को समझ ही नहीं आता कि सही स्थान कौन सा है। इसी तरह कई अन्य गांवों और कस्बों के नाम भी गलत अंकित हैं, जो प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।
दिनारा स्थित पिछोर तिराहे के पास अशोक होटल के सामने लगे बोर्ड का जिक्र करते हुए कल्लू महाराज ने कहा कि यहां हर दिन लोग रुककर रास्ता पूछते हैं। वे बोर्ड पर लिखे नाम के अनुसार “डबरा” खोजते हैं, जबकि स्थानीय लोग उन्हें बताते हैं कि असल में वह “दवरा” है। इस तरह की स्थिति से यात्रियों का समय बर्बाद हो रहा है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
समाजसेवियों—जितेंद्र लोधी, दीपक तिवारी, गजेंद्र लोधी, जितेंद्र योगी, मैथिली शरण गुप्ता, छोटू पाल, राजू लोधी और जयराम लोधी ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक छोटी गलती नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान से जुड़ा विषय है। गलत नामों के कारण न केवल राहगीर भ्रमित हो रहे हैं, बल्कि क्षेत्र की छवि भी खराब हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार यात्री गलत गांव में पहुंच जाते हैं और फिर वापस लौटकर सही रास्ता पूछते हैं। इससे समय, ईंधन और ऊर्जा तीनों की बर्बादी हो रही है। यह स्थिति खासकर उन लोगों के लिए अधिक परेशानी का कारण बनती है जो पहली बार इस मार्ग से गुजरते हैं।
सवाल यह है कि आखिर राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई?
क्या संबंधित विभाग ने इन बोर्डों की जांच नहीं की? क्या बिना सत्यापन के ही नाम लिख दिए गए?
अब क्षेत्र की जनता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन त्रुटिपूर्ण बोर्डों को सही नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
मांग स्पष्ट है—तुरंत सर्वे कर सभी गलत बोर्डों को हटाया जाए और सही नामों के साथ नए बोर्ड लगाए जाएं, ताकि जनता को राहत मिल सके और प्रशासन की साख बनी रहे।
