Devotional story:
मथुरा में होली: रंग, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम | धर्म धर्म Mathura Celebrates Vibrant Holi Festival
मथुरा में बुधवार को होली के अद्भुत रंगों का त्योहार मनाया गया।
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान भक्तों और स्थानीय लोगों ने पारंपरिक उत्साह के साथ होली मनाई, जो कि धर्म और आस्था का एक अनूठा संगम था।
श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि मंदिर के बाहर होली खेली जा रही है, लेकिन गर्भगृह के अंदर नहीं, क्योंकि मंदिर का होली उत्सव होलिका दहन के दिन ही समाप्त हो जाता है।
गोवर्धन तहसील के बछगांव गांव में ‘चप्पल’ होली का आयोजन किया गया, जहां गांव के बुजुर्ग बच्चों को चप्पलों से खेल-खेल में मारते हैं।
स्थानीय निवासी योगेश कुंतल ने बताया कि यह एक-दूसरे के प्रति बिना किसी द्वेष के खेलने की परंपरा है।
लगभग 150 साल पुरानी इस परंपरा का आरंभ अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध करने के लिए किया गया था।
इस दौरान हुरियारे गुलाल उड़ाते हैं और होली के गीतों पर नृत्य करते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
पुराने केशवदेव मंदिर के सेवायत बिहारीलाल गोस्वामी ने बताया कि शाम को भजन संध्या और फूलों की होली का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, हालांकि मंदिर परिसर के अंदर होली नहीं मनाई जाती है।
श्री गरुण गोविंद मंदिर में सेवायत डॉक्टर राजेश गौतम ने बताया कि मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई।
मथुरा, जो कि भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है, इस त्योहार के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो जाती है, जहाँ हर कोई प्रेम और सद्भाव के रंग में रंगा दिखाई देता है।
यह उत्सव न केवल मनोरंजन का स्रोत है, बल्कि यह धर्म और संस्कृति के प्रति लोगों की गहरी आस्था का भी प्रतीक है।
- मथुरा में होली: भक्तों ने पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया रंगों का त्योहार।
- बछगांव में ‘चप्पल’ होली: 150 साल पुरानी परंपरा, अंग्रेजों के अत्याचार का विरोध।
- मंदिरों में विशेष पूजा और भजन संध्या का आयोजन, भक्तिमय वातावरण।
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Posted on 09 March 2026 | Stay updated with चाचा का धमाका.com for more news.