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सोशल मीडिया युग में धर्म और राजनीति: क्या है भक्ति-योग का महत्व? Bhakti And Yoga Prevail
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया के इस दौर में, जहां नई पीढ़ी कल्पनाओं में खोई हुई है, भक्ति और योग का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
पं. विजयशंकर मेहता के अनुसार, सोशल मीडिया ने हमें एक ऐसे काल्पनिक लोक में पहुंचा दिया है, जहां से निकलना मुश्किल हो रहा है।
इस आभासी दुनिया में 'इन्फ्लुएंसर्स' का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि लोग वास्तविकता से दूर होते जा रहे हैं।
ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, जो लोग सही ढंग से भक्ति और योग से जुड़े रहेंगे, वे इस कल्पना-लोक में विचरण करने के बाद भी नुकसान से बचेंगे।
आज के युग में, राजनीति और धर्म दोनों ही सोशल मीडिया से प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे में इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।
"कांग्रेस" और "बीजेपी" जैसी पार्टियों के "नेता" भी इस माध्यम का उपयोग "चुनाव" में अपनी बात पहुंचाने के लिए कर रहे हैं।
ऐसे में, भक्ति और योग न केवल व्यक्तिगत शांति के लिए आवश्यक हैं, बल्कि सामाजिक और "राजनीति" जीवन में भी संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित हो सकते हैं।
- सोशल मीडिया के दौर में भक्ति-योग का महत्व बढ़ा
- कल्पना-लोक से बचने के लिए भक्ति-योग जरूरी
- राजनीति और धर्म में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता
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Posted on 07 March 2026 | Keep reading चाचा का धमाका.com for news updates.