देश का एक कड़वा सच जब देश का अमीर आदमी बीमार होता है तो वो बिना सोचे-समझे विदेश चला जाता है — कभी United States, कभी United Kingdom!

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देश का एक कड़वा सच


जब देश का अमीर आदमी बीमार होता है तो वो बिना सोचे-समझे विदेश चला जाता है — कभी United States, कभी United Kingdom!

लेकिन देश का गरीब और मिडिल क्लास आदमी कहाँ जाए?

सरकारें बड़े-बड़े मंचों से दावा करती हैं कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलता है। कागज़ों में सब कुछ शानदार दिखता है — “फ्री चेकअप”, “फ्री दवाइयाँ”, “जनता के लिए स्वास्थ्य योजनाएँ”।

लेकिन ज़मीन पर सच्चाई क्या है… ये हर आम आदमी जानता है।

जब कोई गरीब मरीज सरकारी अस्पताल में लाइन लगाकर डॉक्टर को दिखाता है, तो डॉक्टर पर्चे पर 5–6 दवाइयाँ लिख देता है। मरीज उम्मीद लेकर अस्पताल की दवा खिड़की पर जाता है… लेकिन वहां से जवाब मिलता है:

“ये दवाई स्टॉक में नहीं है…”

“पीछे से नहीं आ रही…”

“आने में समय लगेगा…”

और हाथ में थमा दी जाती हैं 1–2 सस्ती गोलियाँ।

बाकी महंगी दवाइयों के लिए साफ कह दिया जाता है — “बाहर से ले लो।”

अब सोचिए…

एक गरीब आदमी, जो पहले ही बीमारी से परेशान है, जेब में मुश्किल से 500–1000 रुपये लेकर आया है… वो क्या करे?

उसके पास न कोई शिकायत पोर्टल की जानकारी होती है, न कोई सुनवाई करने वाला।

वो सोचता है — “200–300 रुपये की दवाई के लिए किससे लड़ें? कौन सुनेगा?”

और मजबूरी में बाहर से दवाई खरीद लेता है।

लेकिन सवाल ये है —

जो दवाइयाँ सरकारी रिकॉर्ड में आती हैं, वो जाती कहाँ हैं?

क्यों बार-बार “स्टॉक खत्म” हो जाता है?

आरोप तो ये भी लगते रहे हैं कि कुछ बड़े और लाखों की सैलरी लेने वाले सीनियर डॉक्टर और सिस्टम से जुड़े लोग वही दवाइयाँ बाहर मेडिकल स्टोर्स तक पहुँचवा देते हैं। अगर इसमें जरा भी सच्चाई है तो ये सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गरीब की बीमारी पर व्यापार है… इंसानियत के खिलाफ अपराध है।

ये मुद्दा हाल ही में आम आदमी की आवाज़ उठाने वाले नेता Raghav Chadha ने राज्यसभा में बजट सत्र के दौरान उठाया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की असली तस्वीर सामने आनी चाहिए और गरीब को उसके हक की दवा मिलनी चाहिए।

सवाल सरकार से भी है, सिस्टम से भी है और हम सब से भी है —

क्या “फ्री इलाज” सिर्फ भाषणों तक सीमित रहेगा?

क्या गरीब आदमी हमेशा 200–300 रुपये के आगे चुप होता रहेगा?

या अब व्यवस्था बदलेगी?

स्वास्थ्य कोई सुविधा नहीं, अधिकार है।

और जब तक सरकारी अस्पतालों में सच में हर दवा उपलब्ध नहीं होगी, तब तक “मुफ्त इलाज” सिर्फ एक नारा रहेगा।

अगर आप भी मानते हैं कि गरीब और मिडिल क्लास को उसके हक की दवा मिलनी चाहिए, तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

आवाज़ उठेगी तभी बदलाव आएगा।

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