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कोलारस जनपद में 'सूचना के अधिकार' का गला घोंट रहे जिम्मेदार; भ्रष्टाचार छुपाने के लिए RTI आवेदन लेने से किया इनकार !
शिवपुरी/कोलारस: जनपद पंचायत कोलारस इन दिनों भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के अभाव को लेकर सुर्खियों में है।
ताजा मामला सूचना के अधिकार (RTI) के उल्लंघन का सामने आया है,
जहाँ भ्रष्टाचार को उजागर करने के उद्देश्य से दिए गए
RTI आवेदन को लेने से स्वयं सीईओ (CEO) और उनके अधीनस्थ अमले ने स्पष्ट मना कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश टाइम्स के जिला संवाददाता शिवम शर्मा बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे जनपद कार्यालय कोलारस पहुँचे थे।
पंचायतों में निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और 'पंचायत दर्पण' पोर्टल पर अपूर्ण जानकारी (फोटो अपलोड न होना) से संबंधित RTI आवेदन देना चाहा।
आरोप है कि पहले आवक-जावक लिपिक और पंचायत इंस्पेक्टर ने आवेदन लेने से मना किया,
जिसके बाद सीईओ श्री दिनेश शाक्य ने यह कहते हुए आवेदन लेने से इनकार कर दिया कि "यहाँ कोई लोक सूचना अधिकारी नहीं होता, पंचायतों में अलग आवेदन लगाओ।"
हैरानी की बात यह है कि इस दौरान अधिकारी द्वारा प्रार्थी को चाय-नाश्ते का प्रलोभन देकर मामले को टालने का प्रयास भी किया गया।
भ्रष्टाचार छुपाने की मंशा?
पत्रकार शिवम शर्मा का कहना है कि सीईओ महोदय के पूर्व कार्यकाल (बदरवास) के दौरान RTI के माध्यम से ही करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर हुआ था।
शायद इसी डर से अब कोलारस में भी जानकारी साझा करने से बचा जा रहा है।
वर्तमान में पंचायतों में बिना पूर्णता फोटो के भुगतान और कोरे कागज पर बिलों के खेल की खबरें लगातार आ रही हैं,
जिसे दबाने के लिए पारदर्शिता को खत्म किया जा रहा है।
सूचना आयोग और उच्चाधिकारियों की चौखट पर पहुँचेगा मामला
पत्रकार शिवम शर्मा का कहना है कि— "कार्यालय में जब नियमानुसार आवेदन स्वीकार नहीं किया गया,
आज मैंने इसे स्पीड पोस्ट के माध्यम से सीईओ कार्यालय भेज दिया है।
कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मैं चुप नहीं बैठूँगा।
तानाशाही और माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के विरुद्ध जल्द ही राज्य सूचना आयोग (भोपाल) में धारा 18 के तहत शिकायत दर्ज कराई जाएगी। साथ ही
जिला कलेक्टर और संभागायुक्त को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कठोर विभागीय कार्यवाही की मांग की जाएगी।"
यह मामला अब शिवपुरी जिले के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है
कोलारस जनपद में ऐसा क्या है जिसे छिपाने के लिए अधिकारी कानून की अवमानना करने पर उतारू हैं।
