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जिला न्यायालय में साढ़े बारह सौ मुकदमों की सुनवाई प्रभावित बोले, पुलिस की लापरवाही के कारण हुई वकील की हत्या l
करैरा में शनिवार को एक विवादित जमीन के मामले की पैरवी करने के लिए न्यायालय जाते समय
एडवोकेट संजय सक्सेना की सुपारी किलर ने गोली मारकर हत्या कर दी।
इस हत्या के बाद रविवार को पुलिस ने अल सुबह एक शार्ट एनकाउंटर में हत्या के माले में आरेापित तीन शूटर पपेंद्र पुत्र हरदास रावत उम्र 23 साल निवासी चांदपुर डबरा, गोलू पुत्र अरविंद रावत उम्र 25 साल निवासी घुघसी थाना बड़ौनी, जहीर पुत्र रफीक मुसलमान उम्र 24 साल निवासी घुघसी थाना बड़ौनी को पकड़ने के अलावा सुपारी देने वाले चाचा-भतीजे पूर्व सरपंच सुनील शर्मा व शासकीय शिक्षक कमलेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
सोमवार को पूरे मप्र में वकील की हत्या के विरोध में वकीलों ने हड़ताल की और कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
जिले भर के न्यायालयों में किसी भी प्रकरण की काेई सुनवाई नहीं की गई।
अभिभाषक संघ के अध्यक्ष एडवोकेट विजय तिवारी के अनुसार जिला मुख्यालय के सभी न्यायालयों में वकीलों की हड़ताल के कारण करीब साढ़े बारह सौ मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हुई है।
जिले भर के न्यायालयों की बात करें तो यह संख्या लगभग पांच हजार के आसपास है।
ज्ञापन के माध्यम से ये रखीं मांगें
प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
मृतक वकील के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
मृतक वकील के परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
पुलिस की लापरवाही के कारण हुई वकील की हत्या
अभिभाषकों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया है कि वकील की यह हत्या पुलिस की लापरवाही के कारण हुई है।
एडवोकेट संजय सक्सेना व उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं,
शिकायत भी उनके द्वारा पुलिस को दर्ज करवाई गई थी, परंतु ने धमकियों के इस मामले में निरोधात्मक कार्रवाई करने की बजाय मध्यस्थता कर दोनों पक्षों के बीच राजीनामा करवाने का प्रयास किया।
पुलिस की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि क्या पुलिस दूसरी पार्टी से पैसे लेकर मध्यस्थता का काम कर रही है?
पुलिस शिकायतों के आधार पर एक्शन क्यों नहीं लिया, निरोधात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की
मामले में लापरवाही बरतने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग करेंगे।
अगर कार्रवाई नहीं की जाती है तो पूरे मप्र के वकीलों को हड़ताल करने पर बाध्य होना पड़ेगा।
एडवोकेट संजय सक्सेना की हत्या को व्यक्तिगत झगड़े के कारण की गई पर्सनल किलिंग बताने का प्रयास किया जा रहा है
न्यायालय से किसी अधिकारी से अनुमति लेने के आवश्यकता नहीं है।
प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो जाता है तो निश्चित तौर पर अपराधियों में भय व्याप्त होगा
वकील पर हमला करने से पहले कई बार विचार करेंगे।

