जजों पर शिकायतों का अंबार! क्या न्यायपालिका में पारदर्शिता ज़रूरी? | राष्ट्रीय Judicial Accountability Leadership Timeliness

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जजों पर शिकायतों का अंबार! क्या न्यायपालिका में पारदर्शिता ज़रूरी? | राष्ट्रीय Judicial Accountability Leadership Timeliness

दिल्ली: चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, न्याय व्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण घटनाक्रमों ने देश में न्यायिक जवाबदेही, नेतृत्व और समय पर न्याय को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद को जानकारी दी कि वर्ष 2016 से अब तक सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के कार्यरत न्यायाधीशों के खिलाफ कुल 8630 शिकायतें भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्राप्त हुई हैं।

ये आंकड़े न्यायपालिका के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करते हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन शिकायतों की आवृत्ति हाल के वर्षों में बढ़ी है, और कुल शिकायतों में से लगभग आधी वर्ष 2022 से 2025 के बीच आई हैं।

ये सभी शिकायतें संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीशों से जुड़ी बताई गई हैं।

यह स्थिति दर्शाती है कि न्यायपालिका को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और न्यायाधीशों के आचरण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

सरकार और न्यायपालिका दोनों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में काम करना होगा, ताकि देश की न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे।

हाल के घटनाक्रमों ने न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों और सुधार की दिशाओं की स्पष्ट झलक मिलती है, जिसके लिए भारत सरकार प्रतिबद्ध है।

इन घटनाक्रमों से न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

यह जरूरी है कि न्यायपालिका अपनी छवि को सुधारने और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए।

  • 2016 से अब तक जजों के खिलाफ 8630 शिकायतें दर्ज हुईं।
  • शिकायतों की संख्या में हाल के वर्षों में तेजी से वृद्धि हुई है।
  • न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठी।

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Posted on 14 February 2026 | Follow चाचा का धमाका.com for the latest updates.

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