अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिला हुनर दिखाने का मौका लेकिन जाने के लिए पैसे नहीं !



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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिला हुनर दिखाने का मौका लेकिन जाने के लिए पैसे नहीं !

तमाम मेडल जीत चुकी क्षमा रेडेकर की मदद के लिए लोग आगे आयें: हार्दिक हुंडिया

मुंबई। स्टार रिपोर्ट मेगेज़िन कार्यालय में धाविका क्षमा रेड़कर ने प्रधान संपादक हार्दिक हुंडिया जी से सदिच्छा भेंट कि। हार्दिक हुंडिया जी ने उपवस्त्र एंव सुवर्ण पुष्प से उनका सम्मान किया। 

क्षमा रेड़कर ने अपने शाळा जिवन में मात्र 17 साल की उम्र में कांदिवली से चर्चगेट तक हाथ में मशाल लेकर अकेले नशा मुक्त भारत के लिए मैराथन दौड़ पूरी करने वाली धाविका क्षमा रेडेकर का सम्मान तब मुंबई के तत्कालीन कमिश्नर सुश्री मीरा बोरवणकर के हाथों से ढोल नगाड़े से किया गया और उन्होंने क्षमा रेड़कर को उस वक्त पुलिस में भर्ती होने के लिए कहा। क्षमा कहती हैं कि उन्हें मीरा बोरवणकर और किरण बेदी से प्रेरण मिली है।

उस समय में ना मोबाइल थे, ना तो विडियो थे, उनके पिता की केन्टीन पर जाकर उनके क्षमा के सहपाठी ने बताया कि क्षमा आज कांदिवली से चर्चगेट तक दौड़ी है तब पहले तो उनके पिता को भरोसा ही नहीं हुआ था। 

साल १९९१में क्षमा रेड़कर ने पुलिस विभाग में महीला पुलिस शिपाई (खिलाड़ी)के पद पर ठाणे शहर में भर्ती हुई थी। अपने क्षेत्र में कार्यरत रहते हुए उन्होंने दौड़ कि अनेक प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर के गोल्ड मेडल जीता। और मुंबई पुलिस को चैंपियनशिप दिलाई थी। पुलिस विभाग में सेवा के दौरान उन्होंने गोल्ड, सिल्वर, बोन्झ सहित १६ नेशनल मेड़ल प्राप्त किये। सन २०२१ में २९साल ९ महीने की अपनी पुलिस दल में सेवा पूर्ण करके सेवा निवृत्ती ली है।

अब 62 साल की उम्र में  थाईलेंड में आयोजित होने वाले मास्टर गेम्स में उनका चयन हुआ है। लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए इस  धाविका के पास  की आर्थिक परिस्थितियां आडे़ आ रही है।

क्षमा रेडेकर ने सेवा निवृत्ति के बाद अपने दौड़ के शौक को कायम रखा है। अभी तक में उन्होंने  करीब ५० मेडल , १५ ट्रोफी अपने  नाम की है।मिलींद सोमण के हाथों उनका खास सम्मान हुआ, २०२५ में राज्य स्तरीय गोल्ड मेडल मिला है। वे कहती है इतने मेडल एंव ट्रोफि मिली है कि पुरा घर भर गया है।

इस महीला धावक क्षमा रेड़कर जो एक सिनीयर सीटीझन है, और उन्होंने  अपने इस रनींग के जज्बे को कायम रखकर रोज़ वे करीब करीब पांच किलोमीटर तक दौड़ती है, सबको प्रेरणा भी देते हुवे वे कहेती है कि रोज़ सुबह शाम दौड़ना या चलना चाहिए इससे शरीर कि सारी नसें खुलती है, बीपी सुगर की बिमारी खत्म होती है। वे देशवासियों से और राज्य तथा केन्द्र सरकार से मदद की गुहार लगा रही है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले मास्टर गेम्स में हिस्सा लेकर देश का नाम रोशन कर सके।

साल 1991 में ठाणे जिले में महिला कांस्टेबल के तौर पर क्षमा रेडेकर की भारतीय पुलिस सेवा में भर्ती हुई थी। वर्तमान में वे सेवानिवृत्त हो चुकी हैं लेकिन एक धावक के रूप में वे अभी भी काफी सक्रिय हैं और राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं। अब उनकी निगाह थाईलेंड में आयोजित होने वाले मास्टर गेम्स पर टिकी है। 

गौरतलब है कि पुलिस विभाग में सेवा के दौरान उन्होंने 09 गोल्ड एवं सिल्वर/ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 16 नेशनल मेडल प्राप्त किए हैं। पुलिस विभाग में 29 वर्ष 9 माह की निष्कलंक सेवा पूर्ण कर नियत आयु के अनुसार सेवानिवृत्ति ली है। वर्तमान में उनकी आयु 62 वर्ष है। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने अपने धावक (रनिंग) के शौक को नियमित रूप से जारी रखा। इसके अलावा क्षमा ने हाल ही में आयोजित टाटा हाफ मैराथन (21.97 किलोमीटर) में भाग लेकर उसे सफलतापूर्वक पूरा किया कियाद। वर्ष 2025 इन्हें राज्य स्तरीय 4 गोल्ड मेडल भी प्राप्त हुए हैं।

थाईलैंड जाने के लिए लगा रही मदद की गुहार

फरवरी-2026 में होने वाली बॉर्डर मैराथन में दौड़ने हेतु क्षमा रेडेकर का चयन हुआ है। इसके साथ ही थाईलैंड में आयोजित मास्टर गेम्स के लिए इनका चयन हो चुका है। क्षमा रेडेकर ने देशवासियों, राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से गुहार लगायी है कि, “मैं वर्तमान में सेवानिवृत्त हूँ तथा मेरी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मुझे पैसों की अत्यधिक कठिनाई हो रही है। मेरी बॉर्डर मैराथन एवं थाईलैंड मास्टर गेम्स में भाग लेने की अत्यंत इच्छा है। आज तक मैं अपने लिए दौड़ती रही, परंतु अब मेरी इच्छा है कि मैं देश के लिए दौड़ूं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम गौरवान्वित करूं। इसलिए सबसे विनम्र निवेदन है कि मुझे बॉर्डर मैराथन एवं थाईलैंड मास्टर गेम्स में भाग लेने हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं इन प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जीत हासिल कर सकूं और देश का नाम रोशन कर सकूं।

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